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Kanpur News: स्कोरिंग विषयों काे ले डूबी सख्त मूल्यांकन प्रणाली

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कानपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के इस बार घोषित परीक्षा परिणामों में मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव का साफ असर देखने को मिला है। पहली बार बड़े स्तर पर लागू की गई ओएसएम (ऑनस्क्रीन मार्किंग) प्रणाली ने न सिर्फ कॉपी जांचने के तरीके को बदला बल्कि टॉपर्स की सूची का पूरा ट्रेंड भी बदल दिया।
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नई प्रणाली के तहत परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में जांचा गया जिसमें परीक्षक को सीबीएसई के तय मानकों के अनुसार ही अंक देने होते हैं। यही कारण रहा कि इस बार गणित, भौतिकी और रसायन (पीसीएम) जैसे पारंपरिक स्कोरिंग विषयों के छात्र टॉपर्स की दौड़ में पिछड़ गए। आंकड़ों के अनुसार, टॉप-10 सूची में केवल पीसीएम का एक छात्र ही स्थान बना सका जबकि बाकी स्थानों पर ह्यूमैनिटीज और कॉमर्स वर्ग के छात्रों का कब्जा रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफलाइन कॉपी जांच के दौरान कई बार शिक्षक उत्तर की प्रस्तुति या प्रयास को देखते हुए उदारतावश अतिरिक्त अंक दे देते थे। इससे विशेष रूप से साइंस स्ट्रीम के छात्रों को फायदा मिलता था क्योंकि उनके उत्तरों में आंशिक अंक देने की गुंजाइश अधिक रहती थी लेकिन ओएसएम प्रणाली में हर उत्तर का मूल्यांकन तय स्कीम के अनुसार ही हुआ। इस कारण अतिरिक्त अंक देने की संभावना लगभग खत्म हो गई।
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इस बदलाव का असर केवल टॉपर्स तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि कई स्कूलों के ओवरऑल रिजल्ट पर भी पड़ा है। जहां पहले कुछ स्कूलों में बड़ी संख्या में 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले छात्र होते थे, वहीं इस बार ऐसे छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। विषय विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों और स्कूलों को अब नई रणनीति के साथ तैयारी करनी होगी जिसमें रटने के बजाय कॉन्सेप्ट की स्पष्ट समझ पर अधिक जोर देना होगा।
सिटी कोऑर्डिनेटर बलविंदर सिंह ने कहा कि ओएसएम प्रणाली पारदर्शिता और समानता को बढ़ावा देती है। इस बार परिणाम घटा जरूर है लेकिन पारदर्शिता बढ़ी है। सीबीएसई के नियमों के आधार पर ही कॉपियों का मूल्यांकन हुआ है।
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