कानपुर। सदर तहसील में करीब 22 साल तक तैनात रहे आरोपी लेखपाल आलोक दुबे के एक के बाद एक खेल सामने आ रहे हैं। आरोपी लेखपाल ने तहसील में तैनात एक पूर्व अधिकारी की मदद से कृषि भूमि को आवासीय में बदलवाकर रिंगरोड में गई जमीनों का वर्गमीटर के हिसाब से करोड़ों रुपये का मुआवजा लिया।
सबसे ज्यादा जमीन वर्ष 2019 से 2024 के बीच खरीदी गई। निबंधन विभाग की जांच में पता चला कि 37 बीघा जमीन आलोक और उसके परिजनों के नाम है। करीब 1.8 बीघा जमीन निलंबित लेखपाल अरुणा द्विवेदी के नाम है। लेखपाल की आय से अधिक संपत्ति की जांच के लिए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एंटी करप्शन टीम को पत्र लिखा है।
सिंहपुर कछार के रहने वाले अधिवक्ता संदीप सिंह ने फर्जी कागजात पर चार बीघा जमीन बेचने की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी से की थी। एसडीएम सदर ने मामले की जांच कराई तो लेखपाल आलोक दुबे और अरुणा द्विवेदी दोषी मिले। 7 फरवरी 2025 को दोनों को निलंबित कर दिया गया।
आरोपों की जांच के लिए जिलाधिकारी ने एडीएम न्यायिक, एसडीएम सदर और एसीपी कोतवाली को नामित किया। टीम ने निबंधन कार्यालय से लेखपाल की ओर से जमीन की खरोद-फरोख्त की जांच कराई तो पता चला कि वर्ष 2016 से 2024 तक कुल 41 संपत्तियां खरीदी गईं।
ये संपत्तियां लेखपाल ने सचेंडी क्षेत्र में तैनाती के दौरान ही खरीदीं। ज्यादातर इसी क्षेत्र में तैनात रहा। जिले में रिंग रोड बनने का प्रस्ताव पास होते ही जमीनें खरीदना शुरू कर दिया था। सस्ते दामों में कृषि की जमीनें खरीदीं उन्हें धारा 80 में तब्दील कर आवासीय में करा लिया। जो मुआवजा हेक्टेयर में मिलना था वह वर्गमीटर के हिसाब से वसूला।