बीते तीन माह में थाना क्षेत्र के दो गांवों से 32 साइबर ठग गिरफ्तार हुए और 25 से अधिक फरार हैं। लगभग 200 म्यूल खातों से 80 लाख से करीब एक करोड़ का ट्रांजक्शन किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में अभी भी रोजगार के साधन कम हैं।
यही वजह है कि रेउना के साथ अब कानपुर देहात के भी कुछ गांवों में छोटे स्तर की साइबर ठगी तेजी से फैल रही है। एसीपी घाटमपुर कृष्णकांत ने बताया कि दोनों जगहों के करीब 10 गांव साइबर ठगी के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। पुलिस काम कर रही है। आने वाले समय में यहां से कुछ और साइबर ठग पकड़े जाएंगे।
तीन भाइयों ने चलाया था ठगी का पहला ट्रेनिंग सेंटर
रथगांव निवासी पुष्पेंद्र दिसंबर में तमिलनाडु की किसी फैक्टरी में काम करके लौटा था। वहीं से वह साइबर ठगी का हथकंडा सीखकर आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसने सबसे पहले अपने ही दो और भाइयों को ठगी सिखाई। देखते ही देखते तीनों भाइयों ने मार्च 2025 तक अपने गिरोह के 50 से अधिक साइबर ठग वह भी एक ही गांव से तैयार कर लिए थे।
यही वह समय था जब टोल फ्री नंबर 1930 और प्रतिबिंब पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायतों की भरमार हुई। पुलिस को इन ठगी का कनेक्शन रेउना के रथगांव से मिला और फिर दबिश देकर 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुष्पेंद्र व उसके दोनों भाइयों के खातों में मिलाकर करीब साढ़े सात लाख के ट्रांजक्शन की बात प्रकाश में आई थी।
ऐसे जुटाते हैं अपने शिकार के मोबाइल नंबर
रेउना के साइबर ठग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने या फिर लोगों को डराकर उनसे साइबर ठगी को अंजाम देते हैं। सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करने वालों के नंबर उन्हें जनसेवा केंद्रों से मिल जाते हैं जबकि डराने-धमकाने के लिए वे किसी भी एक नंबर की सीरीज के 100-150 नंबर मिलाते हैं।
इनमें चार पांच लोग तो उनका शिकार बन ही जाते हैं। पुलिस ने बताया कि दो से तीन घंटे में 15-20 फोन मिलाने के बाद साइबर ठग सिम तोड़कर फेंक देते हैं। कानपुर और आसपास के जिलों में सड़कों पर छतरी लगाकर सिम बेचने वालों से थोक के रेट पर सिम की खरीद की जाती और इनका ही इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जाता है।
इन गांवों में अभी चल रहा ठगी का खेल
एसीपी घाटमपुर ने बताया कि रेउना और उससे लगे कानपुर देहात के करीब 10 अधिक गांवों के युवा साइबर ठगी में सक्रिय हैं। रेउना के अंतर्गत रथगांव, गिरसी, दहेली, दुर्गादेवी का पुरवा, लल्लू का पुरवा गांव आते हैं। वहीं, कानपुर देहात की सीमा के पुलंदर गांव के अलावा मूसानगर और गजनेर कस्बों के चार गांवों में भी साइबर ठगों का नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी मिली है।
अब तक हुई ये कार्रवाई
19 अप्रैल को पुलिस ने रथगांव की घेराबंदी कर 20 साइबर ठगों को पकड़ा था। इनके पास 16 स्मार्ट फोन, चार की पैड फोन, करीब 5000 रुपये 12 फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए थे। करीब 17 आरोपी मौके से भाग निकले थे। इसी तरह 14 जुलाई को पुलिस ने गिरसा गांव में दबिश देकर 12 साइबर ठगों को पकड़ा है। इनके पास से भी सात स्मार्ट फोन, तीन की पैड फोन, तकरीबन चार हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि करीब एक साल से रेउना साइबर ठगी का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आमदनी के साधन कम हैं तो भटके युवा साइबर फ्राॅड से जुड़ रहे हैं। इन अपराधियों के कुछ और नेटवर्क पुलिस के रडार पर हैं। जल्द ही कुछ और खुलासे किए जाएंगे।
एडीसीपी दक्षिण, सुमित सुधाकर रामटेके
वीरान नहर कोठी को साइबर ठगों ने बना रखा था अड्डा
घाटमपुर गिरसी गांव स्थित पुरानी नहर कोठी को साइबर ठगों ने अपना अड्डा बना रखा था। वीरान पड़ी नहर कोठी में किसी की आवाजाही न होने से निश्चिंत होकर ठगी का धंधा कर रहे थे। इस पुरानी नहर कोठी से मंगलवार को रेउना थाने की पुलिस ने 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। एसीपी कृष्णकांत ने बताया कि साइबर ठग ऐसी जगह का चयन करते हैं जहां कोई आता जाता न हो। बाग व झाड़ियों वाला खेत आदि स्थानों पर बैठते हैं। गिरसी नहर कोठी में भी सन्नाटा होने के चलते अड्डा बना रखा था।