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Kanpur News: सेवानिवृत्त लिपिक को माना बर्खास्त, नहीं मिलेगी पेंशन-ग्रेच्युटी

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कानपुर। जमानत मिलने से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती जब तक दोषसिद्धि प्रभावी है उसका असर बना रहता है। दोषसिद्ध व्यक्ति को सरकारी सेवा का कोई अनुचित लाभ नहीं मिल सकता। इसी टिप्पणी के साथ डीएम ने हत्या जैसे संगीन अपराध में उम्रकैद की सजा पा चुके कलक्ट्रेट के पूर्व वरिष्ठ लिपिक मलखान सिंह की अर्जी खारिज कर दी और उसकी पेंशन और ग्रेच्युटी के भुगतान पर रोक जारी रखी है।
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मलखान सिंह के खिलाफ शिवराजपुर थाने में दंगा, छेड़छाड़ और हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। गंभीर धाराओं के आधार पर नगर मजिस्ट्रेट की संस्तुति पर उसे 27 अगस्त 2014 को निलंबित कर दिया गया था। 13 अक्तूबर 2014 को आरोप पत्र जारी कर जांच शुरू की गई थी। छह सितंबर 2000 के शासनादेश के तहत विभागीय कार्यवाही को न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक रोक रखा गया था। इसी बीच उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद 24 जुलाई 2017 को निलंबन आदेश वापस ले लिया गया लेकिन विभागीय जांच लंबित रही। 29 अगस्त 2017 को कानपुर देहात की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मलखान सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। 23 जून 2018 को मलखान को फिर निलंबित कर दिया गया। जेल में बंद रहते ही 31 जुलाई 2018 को वह सेवानिवृत्त हो गया। सजा के खिलाफ मलखान ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने 18 मई 2023 को उसे जमानत तो दे दी लेकिन सजा पर कोई रोक नहीं लगाई। जमानत मिलने के बाद अपनी पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए मलखान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की तो हाईकोर्ट ने मामला डीएम के यहां भेज दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मलखान को दोषसिद्ध किए जाने की तारीख से ही सेवा से बर्खास्त करने का आदेश कर दिया। आदेश में यह भी साफ किया कि दोषी कर्मचारी को पेंशन और ग्रेच्युटी का कोई लाभ नहीं मिलेगा। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हवाला भी दिया।
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