इसमें 25 महिला और 33 पुरुष रोगी रहे हैं। जांच में इन रोगियों की गले की नस की पर्त मोटी पाई गई। इनमें मैग्नीशियम की कमी रही है। इसका लेवल बढ़ाए जाने से रोगियों को फायदा हुआ है। सीकेडी के रोगी मैग्नीशियम की कमी दूर कर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक से हिफाजत में रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक इस मिनरल की कमी पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता था। नस की अंदरूनी पर्त मोटी होने से खून का थक्का जम सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का डर रहता है।
केस-एक:
सिविल लाइंस के रहने वाले गुर्दा रोगी दिवाकर (60) को जाड़े में हार्ट अटैक आया था। इसके साथ ही उनके गुर्दे की दिक्कत और बढ़ गई थी। उन्होंने बताया कि जांच कराई गई तो मैग्नीशियम की कमी निकली थी। बाद में डाइटीशियन से चार्ट तैयार कराया। अब उसी लिहाज से भोजन करते हैं।
केस-दो:
जाजमऊ के रहने वाले जगमोहन वर्मा (52) 10 साल से गुर्दे की दवा खा रहे हैं। उन्हें भी बीपी बढ़ने पर ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण आया था। निजी अस्पताल में इलाज से ठीक हुए। बाद में विस्तृत जांचें कराने पर मैग्नीशियम का लेवल कम निकला। बताया कि अब खाने-पीने में एहतियात बरत रहे हैं।
मैग्नीशियम की कमी से यह लक्षण आते हैं
अधिक थकान, भूख न लगना, शरीर में चुभन, मांसपेशियों में दर्द, ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ना आदि।
ऐसे करें बचाव
- हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं।
- बींस, दाल, राजमा आदि दलहनों का सेवन करें।
- जौ, ब्राउन राइस, बाजरा, अंकुरित अनाज खाएं।
- भोजन में मौसमी फलों, सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।
- ज्वार की रोटी, मछली, बादाम, मक्खन-टोस्ट खाएं।