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जालौन: 20 साल पहले युवक को फर्जी मामले में फंसाया, तत्कालीन एसओ समेत सात पर रिपोर्ट

Fri, 09 Oct 2020 12:25 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
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सांकेतिक तस्वीर
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जालौन जिले में पुलिस किस तरह बेकसूर लोगों को फर्जी मामले में फंसाती है, इसका प्रमाण बीस साल बाद सामने आया है। रामपुरा थाना पुलिस ने बीस साल पहले युवक को फर्जी मामला बनाकर एनडीपीएस एक्ट में जेल भेजा था।
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परिजनों की गुहार पर शासन ने जांच सीबीसीआईडी को सौंपी थी। सीबीसीआईडी ने रामपुरा थाने में सात अक्तूबर को तत्कालीन एसओ, तीन सिपाही समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। तत्कालीन एसओ मौजूदा समय सीबीसीआईडी में उपाधीक्षक बताए गए हैं। 

पुलिस के मुताबिक औरैया के अजीतमल थाना क्षेत्र के विद्यानगर, बाबरपुर निवासी मुकेश उर्फ बबलू पुत्र हरदयाल को 31 मार्च 2000 की रात रामपुरा पुलिस घर से पकड़कर थाने लाई थी। अगले दिन मुकेश को एनडीपीएस एक्ट में जेल भेज दिया था।
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परिजनों को भी दो दिन बाद जानकारी मिल पाई थी। उन्होंने थाने में संपर्क किया तो मुकेश से 300 ग्राम चरस बरामद होने का दावा करते हुए जेल भेजने की जानकारी दी गई। परिजनों के मुताबिक वे पुलिस से मुकेश के बेकसूर होने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।

मुकेश की चाची कटोरी देवी पत्नी बाबूराम के प्रार्थना पत्र पर शासन ने सीबीसीआईडी जांच के आदेश दिए। लंबे समय तक चली जांच पड़ताल में मुकेश को निर्दोष पाया गया और तत्कालीन रामपुरा एसओ शैलेंद्र सिंह व तीन सिपाहियों तिलक सिंह, बृजेश कुमार, ब्रजेश्वर दयाल तथा रामकरन, अरुण कुमार, सुरेश चंद्र निवासी अजीतमल को फर्जीवाड़ा कर झूठे मामले में जेल भेजने का आरोपी माना गया। 

रामपुरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा ने बताया कि शैलेंद्र सिंह समेत सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस, बंधक बनाने और फर्जीवाड़ा कर युवक को जेल भेजने का मामला सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर योगेंद्र नाथ की तहरीर पर दर्ज किया गया है। तत्कालीन एसओ वर्तमान में लखनऊ सीबीसीआईडी में उपाधीक्षक पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।
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