कानपुर हैलट में मरीजों की मौत के बाद भी रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी कराने के मामले में सोमवार को सीएमओ की ओर से तैनात प्रतिनिधि एसीएमओ डॉ. सुबोध प्रकाश ने न्यूरो साइंसेज वार्ड में तैनात सिस्टर इंचार्ज, फार्मासिस्ट समेत आठ सिस्टरों से पूछताछ की। साथ ही लिखित बयान भी लिए।
एसीएमओ ने रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी करने से लेकर मरीज को लगाने तक की प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की। हालांकि डॉक्टरों को जांच में शामिल नहीं किया गया है, जबकि इंजेक्शन जारी होेने से लेकर मरीज को लगने तक डॉक्टर की भी अहम भूमिका है। हैलट पहुंचे डॉ. सुबोध प्रकाश ने सबसे पहले हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना से अस्पताल टीम की जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी ली।
इसके बाद न्यूरो साइंसेज में तैनात फार्मासिस्ट नागेंद्र बाजपेई से आधा घंटे पूछताछ की। इसके बाद न्यूरो साइंसेज के अधीक्षक डॉ. प्रेम सिंह, सिस्टर इंचार्ज और न्यूरो साइंसेज में तैनात सभी आठ अन्य स्टाफ नर्स (सिस्टर) से अलग-अलग पूछताछ कर लिखित बयान लिए। डॉ. प्रेेम सिंह ने रेमडेसिविर के जारी होने से लेकर मरीज तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया के बार में बताया। हालांकि मरीज के मौत के बाद भी इंजेक्शन कैसे जारी हुए, इस संबंध में फार्मासिस्ट को छोड़कर सबका बयान एक था।