कानपुर शहर में 'दीनी तालीम' के साथ-साथ अब सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जाएगी। इसके बाद छात्रों को किसी भी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी।
अभी तक देखा जाता रहा है, मदरसों से पढ़ने वाले छात्र मसजिदों और मदरसों तक ही सीमित रह जाते हैं। सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई न किए जाने के कारण इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज उन्हें दाखिला देने से इंकार कर देते हैं।
बता दें छात्रों की सहुलियत को मद्देनजर रखते हुए यह नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसको लेकर जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा के नेतृत्व में एक टीम बंगलूरू और हैदराबाद के स्कूलों का निरीक्षण कर लौट आई है।
अब कानपुर शहर में एक स्कूल खोला जाएगा जहां मदरसा छात्र-छात्राओं को भी एडमीशन मिलेगा। वहां बच्चे आलिम, हाफिज, मौल्वी की पढ़ाई के साथ ही सीबीएसई बोर्ड की आधुनिक शिक्षा हासिल कर सकेंगे।
अभी बंगलूरू और हैदराबाद के सीबीएसई स्कूलों में दो सत्र चलते हैं। इसमें एक सत्र दीनी और दूसरा आधुनिक शिक्षा का होता है। जल्द ही शहर में जमीन तलाशकर बोर्ड से मान्यता के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।