अधिवेशन में बोलते एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमान।
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कानपुर। एक तिहाई आबादी को फैटी लिवर है। 10 और 12 साल के स्कूली बच्चों का लिवर फैटी पाया गया। यह खतरे की घंटी है। संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमान ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि 40 साल की उम्र वाला लिवर बच्चों का मिल रहा है। बिगड़े खानपान और दिनचर्या के साथ स्क्रीन टाइम इस रोग को बढ़ा रहा है।
यूपी एपीकॉन-2025 के सत्र में बताया कि तोंदियल मोटापा अधिक खतरनाक है। 10 सालों में फैटी लिवर के केस अधिक बढ़े हैं। पहले 40-50 साल आयु वर्ग के रोगी अधिक आते थे। अब किशोरों में इसकी दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि फैटी लिवर के कुल रोगियों में 30 फीसदी मोटापाग्रस्त और 30 फीसदी को डायबिटीज होती है। फैटी लिवर लाइफ स्टाइल की बीमारी है। खानपान दुरुस्त रखने और नियमित व्यायाम करके इससे बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव महिला के प्रसव के दौरान नवजात को संक्रमण का खतरा रहता है। इसके लिए गर्भावस्था के आखिरी तीन महीने से दवा देते हैं और प्रसव के तीन महीने बाद तक देते रहते हैं। इससे बच्चे की संक्रमण से सुरक्षा होती है।
पद्मश्री डॉ. आरके धीमान ने बताया कि रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर एसजीपीजीआई में बेड की संख्या तीन हजार होगी। अभी पांच सालों में 1609 से बढ़ाकर 2272 बेड किए गए हैं। इसे क्वार्टरनरी हेल्थ केयर सेंटर बनाया जा रहा है। अभी टर्शरी हेल्थ केयर सेंटर है। जीएसवीएम समेत छह मेडिकल कॉलेजों में टेली आईसीयू सिस्टम शुरू किया गया है। मेडिकल कॉलेजों का स्तर बढ़ाया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का भी इस्तेमाल किया जाएगा।