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सेवा शर्तों पर हुई भर्ती, अब नया नियम थोपना अत्याचार : बृजेश सिंह

Wed, 17 Sep 2025 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। शिक्षकों का टीईटी अनिवार्यता को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। मंगलवार को उत्तर प्रदेशीय शिक्षक संघ के नेतृत्व में जिले भर से एकत्रित हुए शिक्षकों ने कलक्ट्रेट कार्यालय पहुंच प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौपा। संघ के जिलाध्यक्ष बृजेश यादव ने कहा कि नियुक्ति के समय शिक्षकों को तब की सेवा शर्तों के आधार पर भर्ती किया गया था। अब नया नियम थोपना शिक्षकों के साथ अत्याचार है।
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स्कूल के शिक्षण कार्य को समाप्त कर सभी शिक्षक दोपहर ढाई बजे जिला पंचायत कार्यालय के पास एकत्रित हुए। यहां से शिक्षकों ने रैली निकाली। सभी विकास भवन तक गए और वहां से डीएम कार्यालय पहुंचे। इस दौरान शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ नारे लगाते रहे। जिलाध्यक्ष बृजेश यादव ने कहा कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षको को सेवारत रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं है। दो साल में सभी शिक्षकों से टीईटी उत्तीर्ण करवाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। शिक्षकों का मानना है कि न्याय भविष्यगामी होता है, भूतगामी नहीं। इसलिए पुराने शिक्षकों को इस नियम से मुक्त रखा जाए। जिला मंत्री आदित्य गौतम ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति नियमानुसार हुई थी और उन्होंने सेवाकाल के शुरू में ही सभी शैक्षिक योग्यताएं पूरी कर ली थीं। बाद में टीईटी को अनिवार्य बनाने से उनकी नौकरी असुरक्षित हो गई है।
जिला मीडिया प्रभारी अरूण कटियार ने कहा उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को 29 जुलाई 2011 को लागू किया गया है। ऐसी स्थिति में प्रदेश में लागू अधिनियम की तिथि से पूर्व नियुक्त हुए शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता लागू करना अनिवार्य नहीं है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविंद यादव ने अपने विचार रखे। इस दौरान संगठन के संयुक्त मंत्री विष्णु मिश्रा, माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष नागेन्द्र सिंह भदोरिया, जिलाध्यक्ष शिक्षा मित्र श्याम सिंह भदोरिया, जिला संगठन मंत्री विमल सचान, आनंद मिश्रा मैथा, बृजमोहन यादव, धीरेंद्र यादव, सुरेंद्र कटियार, आनंद बाजपेई, इंद्रजीत यादव, हिमांशु त्रिपाठी आदि शिक्षक रहे।
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