चैलेंज मूल्यांकन के नाम पर छात्रों को लूट रहा ये विश्वविद्यालय
Mon, 04 Jun 2018 12:44 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
सार
- मूल्यांकन में पहले देते हैं कम नंबर फिर जांच के नाम पर होती है तीन हजार रुपये की वसूली
- कई छात्रों के नंबर चैलेंज मूल्यांकन के बाद बढ़ते हैं, विवि प्रशासन के खिलाफ कोर्ट जाएंगे छात्र
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में चैलेंज मूल्यांकन (दोबारा उत्तर पुस्तिका की जांच) के नाम पर छात्रों को लूटा जा रहा है। गलती विश्वविद्यालय की होती है और खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
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सीएसजेएम विश्वविद्यालय
इस तरह के कई मामले सामने आने के बाद छात्र एकजुट होकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रहे हैं। दरअसल, विश्वविद्यालय में 2016 में चैलेंज मूल्यांकन की नियमावली लागू हुई थी। इसके तहत अगर कोई छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का फिर से मूल्यांकन कराना चाहता है तो उसे तीन हजार रुपये जमा करने होंगे। इसे चैलेंज मूल्यांकन का नाम दिया गया। इसमें अगर पूर्णांक का 15 प्रतिशत से ज्यादा अंक में बदलाव होगा तभी छात्र के परिणाम को संशोधित किया जाएगा। मतलब अगर कोई परीक्षा 100 अंकों की है तो चैलेंज मूल्यांकन में अगर 15 अंक की वृद्घि होगी तभी परिणाम में बदलाव होगा। लेकिन अगर छात्र के 14 अंक बढ़ रहे होंगे तो उसे विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं मानेगा।
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सीएसजेएम विश्वविद्यालय
15 अंक बढ़ने पर छात्र द्वारा जमा किए गए तीन हजार रुपये में से पांच सौ रुपये काट लिए जाएंगे और उसे 2500 वापस कर दिए जाएंगे जबकि अगर 15 से कम अंक बढ़ रहा होगा तो पूरी धनराशि विश्वविद्यालय प्रशासन जब्त कर लेगा। कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि अभी तक उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। अगर कोई शिकायत करता है तो वह मामले में जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई करेंगी।
वीएसएसडी के छात्र का हर सेमेस्टर में बढ़ा अंक
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वीएसएसडी कॉलेज से एलएलबी कर रहे छात्र अवधेश प्रताप सिंह पिछले दो साल से हर सेमेस्टर में चैलेंज मूल्यांकन के लिए आवेदन कर रहा है। हैरानी की बात है कि हर बार छात्र के नंबर बढ़े हैं। इस बार भी छात्र ने आखिरी सेमेस्टर में लैंड लॉ और महिला विधि के पेपर के लिए चैलेंज मूल्यांकन करवाया। पहले लैंड लॉ में छात्र को 42 अंक मिले थे जो बाद में बढ़कर 66 हो गए। इसी तरह महिला विधि में 45 से 60 अंक हुए। अवधेश ने बताया कि वह अबतक चैलेंज मूल्यांकन के नाम पर दस हजार रुपये खर्च कर चुका है। अब वह विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रहा है। इसी तरह वाईसी शुक्ला को जनरल इंग्लिश व लीगल लैंग्वेज में पहले 43 नंबर मिले थे जो बाद में बढ़कर 63 हुए।
चेलेंज मूल्यांकन में अगर किसी छात्र के 10 नंबर बढ़ते हैं तो उसका संशोधित परिणाम नहीं जारी होता है। यही नहीं उसके तीन हजार रूपये भी जब्त कर लिए जाते हैं। ऐसे सैकड़ों मामले हैं जिसके जरिए विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से वसूली कर रहा है।