सपा में टिकट को लेकर पार्टी में हुए घमासान के चलते अपनों ने ही सपा की नैया विधानसभा चुनाव में डुबो दी है। सैफई से लेकर पूरे इटावा जिले तक पहुंची पारिवारिक रार का असर विधानसभा की चारों सीटों पर पड़ा है। कहीं शिवपाल के लड़ाकों ने सपा में भितरघात किया तो कहीं गठबंधन के नेताओं ने जातीय समीकरण की ओर चुनाव मोड़ दिया। नतीजतन चारों सीटों पर सपा प्रत्याशी धड़ाम हो गए। सदर विधानसभा में कांग्रेस की पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद ने गठबंधन होने के बाद भी सपा प्रत्याशी विजय सिंह की खुलकर मुखालफत की। कांग्रेस समर्थित मतदाताओं को बसपा की झोली में डालकर सपा प्रत्याशी को कमजोर किया। इसके साथ ही अपनों के ही भितरघात से विजय सिंह को करारी हार का मुंह देखना पड़ा।
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करारी हार का मुंह देखना पड़ा
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अखिलेश यादव
अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा के ब्लाक प्रमुख डॉ. सुबोध यादव ने लोकसभा चुनाव में अपने पिता रामेश्वर सिंह यादव की हार का बदला नरेंद्र सिंह से भितरघात करके लिया। वहीं अखिलेश यादव के नरेंद्र सिंह को टिकट देने से नाराज सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने लोकदल से प्रदीप यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व होमगार्ड एवं वैकल्पिक शिक्षा मंत्री नरेंद्र सिंह ने यहां से चुनाव मैदान में उतरे रामेश्वर सिंह यादव का जमकर विरोध किया था। उनके विरोध के चलते रामेश्वर सिंह यादव को करारी हार का मुंह देखना पड़ा था। इस हार का बदला डा. सुबोध यादव ने पार्टी में भितरघात करके ले लिया।
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लामबंद होकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया
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अखिलेश यादव
कायमगंज विधानसभा क्षेत्र में ऐन वक्त पर भाजपा समर्थित डा. सुरभि सिंह को सपा प्रत्याशी बना दिया गया। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर निवर्तमान विधायक अजीत कठेरिया का टिकट काट दिया गया। इसके बाद रामशरन कठेरिया का भी टिकट काटा गया। इससे नाराज सपाइयों ने भितरघात कर भाजपा प्रत्याशी अमर सिंह खटिक के पक्ष में मतदान कर उन्हें भारी बहुमत से विजयी बनाया। यहां मुस्लिमों के सपा के पक्ष में ध्रुवीकरण को देखकर अन्य जातियों के सभी लोगों ने लामबंद होकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया।
जमाल सिद्दीकी को चुनाव हारना पड़ा
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डेमो पिक
भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में वरिष्ठ सपा नेताओं को दरकिनार कर निवर्तमान विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी के पुत्र अरशद जमाल सिद्दीकी को टिकट दे दिया गया। इससे सपा का एक बड़ा खेमा नाराज हो गया। उमेश यादव सहित कई लोगों ने खुलकर सपा प्रत्याशी का विरोध किया। यहां भी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की रणनीति के चलते उमेश की मां उर्मिला देवी को चुनाव मैदान में उतार दिया गया, जिससे सपा समर्थित मतदाता उर्मिला यादव के पक्ष में चले गए और सपा प्रत्याशी अरशद जमाल सिद्दीकी को चुनाव हारना पड़ा।
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सभी सीटों पर भाजपा विजयी
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डेमो पिक
सेंट्रल यूपी के पूर्वी छोर पर स्थित हरदोई, उन्नाव और फतेहपुर जिले में भी भाजपा ने सपा को जोर का झटका दिया है। यहां सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी थी। नरेश अग्रवाल किसी तरह अपने बेटे नितिन अग्रवाल को जिता पाए। हरदोई जिले में पिछले चुनाव में सपा को छह सीटें मिली थीं, जबकि दो बसपा के पास थी। इस बार कड़ी टक्कर के बीच सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल तो चुनाव जीत गए, लेकिन अन्य सभी सीटों पर भाजपा विजयी रही।
इसी तरह उन्नाव में सपा के पास चार और भाजपा व बसपा के एक-एक सीट थी। यहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सिपहसलार एमएलसी सुनील सिंह साजन व अन्य नेताओं की सीधे तौर पर सक्रियता थी। इसके बाद भी यहां सपा ने सभी सीटें गंवा दी। भाजपा ने पांच तो बसपा को एक सीट पर कामयाबी हासिल की है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले फतेहपुर निवासी नरेश उत्तम को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप कर कुर्मी वोट को साधने की कोशिश की थी, लेकिन यह कोशिश नरेश उत्तम के गृह क्षेत्र में ही करिश्मा नहीं दिखा पाई। यहां पिछले चुनाव में सपा को दो, बसपा को तीन और भाजपा को एक सीट मिली थी। इस बार सभी सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है।