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पढ़िए अाखिर क्याें छलक आई 103 साल के स्वतंत्रता सेनानी की आंखे

Wed, 17 Aug 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर
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अमर उजाला समूह की अाेर से स्वतंत्रता सेनानियाें काे सम्मानित करते जिलाधिकारी काैशल राज, एसएसपी शलभ माथुर व अन्य अतिथि। - फोटो : रविंद्र भाटिया, कानपुर
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अमर उजाला की ओर से मां तुझे प्रणाम सांस्कृतिक समाराेह एवं स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समाराेह का भ्व्य अायाेजन किया गया। करीब पांच हजार से भी अधिक युवाअाें की भीड़ चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्राैद्याेगिकी विश्वविद्यालय के सभागार में जुटी थी। समाराेह में सम्मानित हाेने वाले सेनानियाें ने आजादी के कई अनकही बातें बतार्ई। माैजूदा हालात पर दुख प्रकट किया। कहा, आज हम अपनी आजादी के मायने भूलते जा रहे हैं। रेप, भ्रष्टाचार, आतंकवाद जैसी घटनाएं रूला देती हैं। पेश है सेनानियाें के संबाेधन का कुछ अंश...
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आजादी में पाने से ज्यादा हमने खोया है
कन्नौज से आए 103 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोवर्धन लाल कनौजिया ने कहा कि आजादी पाने के बाद हमने कुछ पाया है वहीं कफी कुछ खोया है। हम अपनी संस्कृति को भूल चुके हैं। खादी को भूल चुके हैं। आज फैशन के दौर में कोई भी सिर पर टोपी नही लगाता। धोती की जगह पैंट ने ले ली है। इस दौरान उन्होंने कुछ  ‘मेरी जां  रहें ना रहे, हिंद मेरा आजाद रहे। माता के सिर पर ताज रहे, मां बहनों की लाज रहे जैसी कुछ लाइनें भी सुनाई। 103 वर्ष की उम्र में उनके जज्बे को देखकर सभागार में मौजूद लोगों ने स्काउट ताली से उनका स्वागत किया। 
रेप पर उठाए सवाल 
फतेहपुर के दुगरई गांव से आए 88 वर्षीय रामसनेही सिंह ने कहा कि देश से यदि भ्रष्टाचार मिट जाए तो ये देश एक बार फिर सोने की चिड़िया बन जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपना पेट भरने में लगे हैं। कोई उन्हें बता दो कि आप न साथ कुछ लेकर आए थे। न ही कुछ लेकर जाएंगे। उन्होंने रेप पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज आए दिन मां बेटियों के विषय में अखबार में उलटा सीधा छपता है। भ्रष्टाचार खत्म हो जाए तो यह समस्या भी खत्म हो जाएगी।  
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घर और देश में अंतर करना बंद करें
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि और जानी मानी एस्ट्रोलॉजर जया मदान ने लोगों से अपील की कि वे लोग घर और देश में अंतर करना बंद कर दें। जब घर में कोई गंदगी करता है तो आप उसे साफ करते है। देश को भी अपना घर समझें। यदि आप प्रतिदिन रोड से तीन रैपर उठाकर डस्टबिन में डालेंगे तो आपके पास सुख समृद्धि आएगी। इसी प्रकार बाहर पानी का नलका कहीं खुला दिखे तो उसे भी बंद करें। भले उसका बिल आप पर नहीं आ रहा लेकिन ऐसा करना एक देश सेवा है। उन्होंने कहा कि  मै जब दुबारा इस शहर में आऊं तो यह शहर साफ सुथरा दिखना चाहिए।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व उनके परिजनों को मिले सुविधाए
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजय डालमिया ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व उनके परिजनों को सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्हें रोटी कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए। ये लोग हमारे देश की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कितनी यातनाएं सही इसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक खबर आई थी कि रामप्रसाद विस्मिल के घर की छत टूटी हुई है। ऐसी खबरें आना शर्मनाक है। 


इन्हें मिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सम्मान
1- मानवती आर्या-  1944-45 तक आजाद हिंद फौज से जुड़ी रहीं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के रानी रेजीमेंट में भी रहीं। 1944 में एक ट्रक से लड़कियों के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ फ्रंट की ओर से जा रही थीं तो नेताजी ने कहा कि उनकी टीम को क्या किसी मदद की जरूरत है तो उन्होंने कहा कि नहीं। सब खुश हैं।

2- राम शंकर श्रीवास्तव
1955 में गोवा की आजादी के लिए किए गए आंदोलन में हिस्सा लिया। 1955 में इन्हें 11 साल की सजा सुनाई गई लेकिन दो साल बाद जेल से रिहा हो गए। आंदोलन के दौरान पुर्तगालियों से लोहा लेते वक्त खून से पूरा कुर्ता लाल हो गया था।
3- धर्म कुमार सिंह
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब इनके पिता धर्म ध्रुव सिंह अंग्रेज सिपाहियों को पीटने के बाद भूमिगत हो गए तो देश का नारा बुलंद करने के लिए धर्म कुमार सिंह ने आवाज बुलंद की। पांच साल की उम्र से ही बच्चों की सेना बनाकर अंग्रेजों का सामना किया।
4- ठा. मानसिंह (उम्र 103 साल)
कानपुर जनपद के कसबा भीतरगांव, घाटमपुर के रहने वाले ठाकुर मान सिंह आजादी की लड़ाई के दौरान 1939 में जेल गए। वर्ष 1941 में जेल से रिहा हुए। इस दौरान छह महीने का सश्रम कारावास भी काटा। कानपुर, गाजीपुर और बस्ती की जेलों में भी बंद रहे। उनका पूरा जीवन देश के लिए समर्पित रहा।
5 हरबंश सिंह
- हरबंश सिंह इस वक्त 92 वर्ष के हैं। 1942 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करना चाहा। एडमिशन भी लिया लेकिन इसी दौरान महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन शुरू हो गया। हरबंश सिंह ने आखिरकार देश की पुकार सुनी और जंग-ए-आजादी की मुहिम में कूद पड़े। हरबंश को अंग्रेजी हुकूमत के तमाम अत्याचार सहने पड़े।
6- रामसनेही
राम सनेही का जन्म 2 दिसंबर 1928 को फतेहपुर के दुगरई गांव में हुआ और 1942 के असहयोग आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 16 युवाओं की टोली बनाकर अंग्रेजों के टेली ग्राफिक भवन में तोड़फोड़ की। टेलीफोन के तार काटकर संचार व्यवस्था बाधित कर दी। रेलवे की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया। नाबालिग (14 साल) होने के बावजूद अंग्रेजों ने उन्हें पांच साल तक जेल में रखा।
7- गोविंद प्रसाद
गोविंद प्रसाद फर्रुखाबाद जिले के सिकंदरपुर गांव में पैदा हुए। इस वक्त ये 97 वर्ष के हैं। सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सैनिक रहे। महज 12 वर्ष की उम्र में फर्रुखाबाद के डाकघर में आग लगाकर अंग्रेजी हुकूमत को अपने इरादे जता दिए। इन्हें12 साल की उम्र में ही एक साल तक जेल में रहना पड़ा। गोविंद प्रसाद बताते हैं कि जेल के अंदर उनसे मजदूरी कराई गई थी।
8 राज नारायण अवस्थी
इस वक्त उम्र 93 वर्ष हैं। अकौड़ी गांव के मजरा विजय सिंहपुर निवासी राम नारायण अवस्थी 14 साल की उम्र में ही जंगे आजादी से जुड़ गए। गांव के पास जमींदार एक किसान की पिटाई कर रहे थे। किसान मदद की गुहार लगा रहा था। यह देखकर वह भागकर पहुंचे और उसे बचाया। 1941 में पहली बार जेल गए।
9-राजाराम कटियार
मूल रूप से सिकंदरा तहसील (कानपुर देहात) के डुबकी हसनपुर गांव निवासी 97 वर्षीय राजाराम कटियार ने महात्मा गांधी के आह्वान पर सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। 1941 में जेल गए। यह स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े जवानों की टुकड़ियों में शामिल हुए। गांव-गांव जाकर लोगों को तैयार किया। देश को आजाद कराने के लिए सहयोग जुटाने के साथ ही युवाओं को जागरूक किया।
10- गोवर्धन लाल कनौजिया
गोवर्धन लाल कनौजिया 103 वर्ष के हैं। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर गोवर्धन ने सरकारी नौकरी छोड़ दी, फिर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में तिर्वा (कन्नौज) के शहीद स्थल तमोली वाले मंदिर पर अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका। करीब 14 महीने तक तक अंडमान निकोबार की जेल में रहकर काले पानी की सजा काटी। जेल से आने के बाद भी वह कई आंदोलन में लगातार सक्रिय रहे।
11-भगवती सिंह विशारद
उन्नाव जिले में भगवती सिंह विशारद 20 साल की उम्र में सत्याग्रह आंदोलन से जुड़े। महात्मा गांधी के आह्वान  पर अंग्रेजों की खिलाफत की। इस दौरान कई बार लाठियां खाईं। उन्नाव के बीघापुर झगरपुर गांव निवासी भगवती सिंह ने कानपुर नगर के डीएवी कालेज से बीकॉम की डिग्री ली। भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से 1957 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह सात बार विधायक रहे।
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