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Raniya Fire Incident: विशाल और अजीत बन गए थे आग का गोला, जलते हुए निकाले गए बाहर, पढ़ें घायल की आंखों देखी

Sun, 22 Sep 2024 10:26 AM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर देहात

सार

सुरेंद्र ने बताया कि सुबह मशीन से गद्दे का फोम बनने के बाद वह दो गाड़ी में फोम लादकर गोदाम में रखने के लिए ले गया था। शिवम, रवि और रोहित के साथ एक गाड़ी से फोम उतारकर चुके थे। इसी बीच अचानक धमाके से आग लग गई।
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रनियां अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रनियां की फैक्टरी में लगी आग में झुलसे चार लोग दोपहर तक जिला अस्पताल में भर्ती थे। इसमें से एक घायल ने आंखों देखी दास्ता बयां की तो लोगों के सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। गजनेर थाना क्षेत्र के जरिया निवासी सुरेंद्र ने बताया कि गांव के बसन्तु के माध्यम से उसके जीजा से रनियां की फैक्टरी में मजदूरी करने बात हुई थी। बसन्तु के जीजा फैक्टरी में ठेके पर सुरेंद्र व उसका छोटा भाई रोहित, चचेरे भाई शिवम और पारिवारिक भतीजा रवि को काम पर ले गए थे।

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सुरेंद्र ने बताया कि सुबह मशीन से गद्दे का फोम बनने के बाद वह दो गाड़ी में फोम लादकर गोदाम में रखने के लिए ले गया था। शिवम, रवि और रोहित के साथ एक गाड़ी से फोम उतारकर चुके थे। इसी बीच अचानक धमाके से आग लग गई। फैक्टरी का मेन गेट खुला होने की वजह से सभी बाहर भागे मगर विशाल और अजीत बुरी तरह से चपेट में आग गए और दोनों के शरीर आग का गोला बन गए। किसी तरह से बाहर निकाल उनके ऊपर पानी डाला। इसके बाद अस्पताल भिजवाया गया।

आधा घंटा देरी से पहुंची एंबुलेंस
जिला अस्पताल में भर्ती सुरेंद्र का कहना है कि गांव के लोगों ने एंबुलेंस को कॉल किया तो वह आधा घंटा बाद पहुंची थी। इस वजह से घायल फैक्टरी के बाहर ही तड़प रहे। एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर सुनील कुमार ने बताया कि करीब 7:28 बजे एंबुलेंस की पहली कॉल रिसीव हुई थी। 15 मिनट में तीन गाड़ियां पहुंच गई थी। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस कर्मचारी ने जीपीएस युक्त कैमरे से वीडियो भी बनाया था। सुनील ने बताया कि पांच एंबुलेंस से सात मरीज गए थे।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए तैनात किए गए एसीएमओ
घटनास्थल रनियां में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से सुचारू रूप से चलती रहे, इसके लिए सीएमओ डॉ. एके सिंह ने एसीएमओ डॉ. एसएल वर्मा को मौके पर भेजा था। देर शाम तक वह घटनास्थल पर ही जमे रहे। सीएमओ ने बताया कि एंबुलेंस से लेकर अन्य स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एसीएमओ को मौके पर भेजा गया है। घायलों के इलाज व उनके स्वास्थ्य को लेकर पल-पल की जानकारी ली जा रही है।

सुबह छह बजे गैस रिसाव हुआ
रनियां के रघुनाथपुर के पास बिना फायर एनओसी संचालित फोम की गद्दा फैक्टरी में शनिवार सुबह छह बजे गैस रिसाव से आग लग गई। गोदाम में काम कर रहे 11 मजदूरों में से 10 अंदर ही फंस गए। किसी तरह सात को बाहर निकाला गया। शाम करीब चार बजे फैक्टरी से तीन जले हुए शव मिले। इनकी पहचान नहीं हो सकी है। वहीं, एक घायल की उपचार के दौरान मौत हो गई। छह मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, इनमें से दो की हालत गंभीर है।

परिसर में आग के बचाव के जरूरी इंतजाम नहीं
दरअसल, इंवेस्टर्स समिट में एमओयू के बाद करीब डेढ़ साल पहले मानकों को दरकिनार कर फैक्टरी में उत्पादन शुरू कर दिया गया। फैक्टरी के निर्माण के दौरान प्रोविजनल (अस्थायी) प्रमाणपत्र तक नहीं लिया गया। परिसर में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम तक नहीं किए गए। दिखावे के लिए हाइड्रेंट लाइन और ट्रैंक बनाया गया है। टैंक से पानी उठाने के लिए एक भी पंपिंग सेट नहीं लगाया गया। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

ये मजदूर कर रहे थे काम
रनियां के खानचंद्रपुर रोड स्थित शिवनाथपुर के पास आरपी पॉली पैक फैक्टरी है। इसमें फोम के गद्दे बनते हैं। फैक्टरी में करीब 30 मजदूर काम करते हैं। शुक्रवार से ही रात की शिफ्ट शुरू हुई थी। गोदाम में गद्दा पैकिंग के लिए 11 मजदूर रोहित (22) पुत्र श्याम लाल, शिवम (19) पुत्र राममशंकर, अजीत (16) पुत्र रामशंकर, रवि (24) पुत्र कमलेश, विशाल (20) पुत्र छुट्टन, सुरेंद्र (22) पुत्र श्यामलाल निवासी जरीहा थाना गजनेर, प्रांशु (19) पुत्र धर्मेंद्र कुमार निवासी सुजौर थाना देवराहट, लवकुश (20) पुत्र असर्फी लाल निवासी अन्नतापुर बरौर, अमित (19) पुत्र लालता प्रसाद निवासी आनतापुर बरौर, मनोज (18) पुत्र राम खिलवान निवासी मुड़रा स्याही रूरा, संजय (22) पुत्र राम खिलावन निवासी स्याही रूरा काम कर रहे थे।

तेज धमाके के साथ लगी आ
सुबह छह बजे के करीब संजय पानी पीने के लिए बाहर निकला। इसी बीच तेज धमाके से आग लग गई। मजदूर कुछ समझ पाते गोदाम आग का गोला बन गया। फैक्टरी में मौजूद गार्ड श्रीकांत, सुंदरलाल व मजदूर संजय ने आसपास के लोगों और पुलिस को जानकारी दी। सुबह आठ बजे के करीब माती से दमकल की दो गाड़ियां पहुंचीं। इसके बाद कानपुर नगर, एचपीसीएल प्लांट व कानपुर देहात की 10 दमकल गाडि़यां, पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने विशाल, अजीत, सुरेंद्र, रोहित, शिवम, रवि, अमित को गंभीर हालत में जिला अस्पताल व रनियां के अस्पतालों में भर्ती कराया। इसी बीच आग भड़क गई और गोदाम का टिनशेड दीवारों के साथ ढह गया। इससे अंदर फंसे मनोज, लवकुश, प्रांशु को बाहर नहीं निकाला जा सका।

गैस रिसाव और स्पार्किंग बताई जा रही मुख्य वजह
आग लगने की वजह गैस रिसाव और स्पार्किंग बताई जा रही है। इधर, शाम पांच बजे के करीब गंभीर हालत में रेफर किए गए अमित पुत्र लालता प्रसाद निवासी अंतापुर बराैर की कानपुर के हैलट में मौत हो गई। फैक्टरी गेट के बाहर परिजन शव दिखाने व अंदर जाने को लेकर हंगामा करते रहे। मृतकों के परिजनों का बुरा हाल रहा। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी उन्हें ढांढस बंधाते रहे।
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आरपी पॉलीपैक फैक्टरी की फायर अनापत्ति नहीं थी। करीब डेढ़ साल पहले अस्थायी अनापत्ति के लिए आवेदन किया था। नियमानुसार आवेदन नहीं होने पर अनापत्ति देने से मना कर दिया गया था। शनिवार को आग लगने की घटना की सूचना पर फैक्टरी परिसर देखा गया। अग्निसुरक्षा इंतजाम नहीं मिले। हाइडेंट लाइन बनी मिली। टैंक से पानी पंप करने के लिए कोई मोटर नहीं लगा है। साफ है कि अग्नि सुरक्षा के इंतजाम सक्रिय नहीं मिले।
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