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Kanpur News: राम की लीलाएं जीवन के सत्य का दर्पण

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मंदाकिनी दीदी - फोटो : संवाद
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कानपुर। भगवान श्री राम की लीलाएं सिर्फ इतिहास नहीं हैं बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण हैं। तुलसीदासजी ने रामचरितमानस के माध्यम से इनको ग्रंथ का रूप दिया। यह विचार शनिवार को मंदाकिनी दीदी ने सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में श्रीराम कथा सुनाते हुए व्यक्त किए। इस दौरान पूरा हॉल श्रोताओं से भरा रहा।
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उन्होंने चित्रकूट को पवित्रता का प्रतीक बताया। कहा कि दंडकारण्य की कथा सिखाती है कि मानव मन में ऋषि अगस्त्य जैसी साधना भी है और खर-दूषण जैसे राक्षसी प्रवृत्ति भी। यहीं पर शबरी की निष्कपट भक्ति और शूर्पणखा की वासनात्मक इच्छा का भी चित्रण मिलता है। शबरी के प्रेम में भक्ति की गहराई है जबकि शूर्पणखा का आकर्षण अहंकार और स्वार्थ से भरा हुआ है। यही अंतर उन्हें भगवान श्रीराम के निकट या दूर ले जाता है। रामकथा हमें आत्मनिरीक्षण और अनुशासन का संदेश देती है। यह बताती है कि यदि मनुष्य अपने भीतर की प्रवृत्तियों को पहचान ले तो जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान संभव है। इसी कारण रामचरितमानस आज भी कालजयी और प्रासंगिक ग्रंथ है।
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