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कभी मुफलिसी में भी गुजरा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जीवन, जानें कुछ अनसुने किस्से

Mon, 02 Oct 2017 07:54 AM IST
प्रशांत कुमार, अमर उजाला, कानपुर
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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आज देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्मदिन है। यूपी के कानपुर देहात जिले के परौंख में 1 अक्टूबर 1945 को रामनाथ कोविंद का जन्म हुआ। आज उन्होने जीवन के 72वें वर्ष में प्रवेश किया है।
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"राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद" आज एक ऐसी शख्सियत हैं जो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। लेकिन उनके जीवन के कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिनको सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। ये पहलू एक साधारण भारतीय के लिए प्रेरणादायी भी हैं।
   
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का बचपन बेहद गरीबी में बीता है। वह मूल रूप से कानपुर देहात की डेरापुर तहसील स्थित परौंख गांव से ताल्लुक रखते हैं। रामनाथ के साथ कक्षा आठ तक पढ़ने वाले उनके बचपन के दोस्त जसवंत ने बताया कि घास-फूस की झोपड़ी में उनका पूरा परिवार रहता था। जब रामनाथ कोविंद 5 वर्ष के थे तभी उनकी मां का देहांत हो गया। मां के देहावसान के बाद उनका पालन पोषण उनके पिता ने किया। उनके सहपाठी बताते हैं कि रामनाथ कोविंद 13 साल की उम्र में 13 किलोमीटर चलकर पढ़ने जाते थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पिता मैकूलाल वैद्य थे। गांव में ही उनकी कपड़े की दुकान भी थी।समय मिलने पर कभी-कभी कोविंद जी भी अपने पिता के साथ दवाखाने में बैठते थे। उनकी मेहनत और लगन ने ही आज उनको देश का राष्ट्रपति बनाया।  

गरीब परिवार में जन्में रामनाथ कोविंद के जीवन पर उर्दू शायर मुनव्वर राना की ये लाइनें सटीक बैठती हैं---
उन्हीं को ही सरबुलंदी अता होती है दुनियां में 
जो अपने सर के नीचे हाथ का तकिया लगाते हैं
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