कानपुर। श्रीरामलीला सोसाइटी के बैनर तले आयोजित रामकथा के दूसरे दिन रामचरित मानस मर्मज्ञ मंदाकिनी दीदी ने कहा कि युवा पीढ़ी करे बताएं कि रामचरित मानस त्रेता युग की कथा ही नहीं बल्कि वर्तमान जीवन का सत्य है। दशरथ और दसमुख ये पात्र भर नहीं बल्कि जीवन दर्शन हैं।
उन्होंने मैनाक पर्वत की कथा सुनाकर कहा कि हर बड़े लक्ष्य के बीच में ऐसा कम्फर्ट जोन आता है पर उस बाधा को पार करना है। रामकथा का आयोजन मर्चेंट चैंबर हॉल में किया गया। मंदाकिनी दीदी ने कहा कि सनातन धर्म का दर्शन सकारात्मक और समसामयिक है। रामचरित मानस के संकेतों और प्रतीकों में जीवन का रहस्य छिपा है।
फिर मैनाक पर्वत की कथा सुनाई कि जब हनुमान जी मां सीता के पास लंका जा रहे थे तो समुद्र के बीच से स्वर्ण का मैनाक पर्वत निकल आया और उनसे एक रात्रि विश्राम और भोजन के लिए कहने लगा। हनुमान जी भूखे भी थे लेकिन लक्ष्य बड़ा था तो इस कम्फर्ट जोन रूपी बाधा को पार किया।
उच्चतम लक्ष्य लेकर चलने वाले साधक के मार्ग में यह पहली बाधा होती है। एक बच्चे ने एक बार कहा कि कि रावण के 10 मुख थे, वह बहुत इंटेलिजेंट था। उसे बताया गया कि रावण को पता ही नहीं था कि 10 सिरों से क्या करना चाहिए। उन्होंने बताया कि राजा दशरथ के शासन काल में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों फल विद्यमान थे। राम, लक्षण, भरत और शत्रुघन ये चार फल के स्वरूप हैं।
व्यक्ति की 10 इंद्रियों की समस्याओं का समाधान राम चरित मानस में उपलब्ध है। जेन जी और जेन अल्फा को इन्हें समझाएं। कामना रखना बुरा नहीं है लेकिन अर्थ और काम की भूख अमर्यादित नहीं होनी चाहिए। इन्हें धर्म और मोक्ष से नियंत्रित करें। मंदाकिनी दीदी ने कहा कि मानस चारों युगों की कथा है। इस मौके पर राजीव गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, आलोक अग्रवाल, अमरनाथ मेहरोत्रा, पवन अग्रवाल, राजीव शुक्ला, वीरेंद्र अग्रवाल, गोपाल कृष्ण माहेश्वरी आदि मौजूद रहे।