उन्होंने कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। ऐसे में पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से अलग नहीं हो सकती है। बता दें कि भाजपा सांसद संघमित्रा ने पूरे मामले में कहा था कि पिता ने रामचरितमानस की जिस चौपाई का जिक्र किया है। उस पर विद्वानों के साथ चर्चा की जाना चाहिए।
कार्रवाई का संकेत, तो नहीं दे गए भाजपा अध्यक्ष
प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान राजनीतिक गलियारों में एक नई गर्मी पैदा कर सकता है। अभी तक बदायूं से सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य पर सिर्फ सवाल उठ रहे थे, लेकिन पहल बार प्रदेश अध्यक्ष के बयान को कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है। ये बयान 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए एक नए समीकरणों को तैयार करने जैसा है।