रमजान मुबारक का चांद सोमवार को नजर आने के बाद मुबारकबादी का सिलसिला शुरू हो गया। मस्जिदों और विभिन्न संस्थानों के कैंपस में लोगों ने तरावीह की नमाज अदा की। मंगलवार को लोगों ने पहला रोजा रखा। इस मौके पर उलमा ने लोगों से अपील की है कि पाबंदी से नमाज पढ़ें और रोजा रखें। रमजान महीने में इबादत का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का खास ख्याल रखने के साथ ही गरीब बस्तियों में सहरी और इफ्तार का इंतजाम कराने की अपील की गई। बाजारों में लोगों ने खरीदारी की।
ऑल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल के कौमी सदर मौलाना मो. हाशिम अशरफी ने कहा कि रमजान मुबारक महीना है। लोग इसका एहतिमाम करें। वहीं, जमीअत उलमा के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासनी ने लोगों से अपील की है कि रमजान के एहतराम में खुले आम खाने-पीने से बचें। रमजान में मुल्क की तरक्की और अमन की दुआ करें। चांद की तस्दीक होने के बाद मुस्लिम बहुल इलाकों के बाजारों में माहौल बदल गया। तलाक महल, बेकनगंज समेत विभिन्न इलाकों में लोग सहरी और इफ्तार के सामान की खरीदारी करते रहे।
पहला अशरा रहमत का
शहर काजी मौलाना मुश्ताक मुशाहिदी ने बताया कि रमजान का पहला अशरा रहमतों का होता है। इस दौरान सारा वक्त इबादत में लगाएं। रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नम से छुटकारे का होता है। अशरा का मतलब हिस्सा होता है। रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है।