रोजेदारों ने रमजानुल मुबारक का पहला रोजा मस्जिदों और घरों में दस्तरख्वान सजाकर खोला। सूर्यास्त के बाद मगरिब की नमाज की अजान से पहले रोजेदारों ने खजूर और पानी पीकर रोजा खोला और अल्लाहताला का शुक्र अदा किया।
जिन बच्चों ने पहली बार रोजा रखा उनकी रोजाकुशाई धूमधाम से की गई। इसके साथ ही रमजान हेल्प लाइन पर बताया गया कि लोबान सूंघने से रोजा चला जाता है। रमजान से संबंधित कार्यक्रमों में बताया गया कि रोजा तंदरुस्ती का जरिया है।
रमजानुल मुबारक के पहले रोजे की मंगलवार से शुरुआत हो गई। लोगों ने रोजेदारों के लिए इफ्तारी तैयार करके मस्जिदों में भेजी। यहां रोजेदारों ने सामूहिक रूप से रोजा खोला। लोगों ने घरों में भी इफ्तार किया।
इसके अलावा आल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल की माहे स्याम हेल्पलाइन और कुलहिंद इस्लामिक इल्मी अकादमी की अल शरिया हेल्प लाइन पर लोगों ने रोजों से संबंधित मसले पूछे। हेल्पलाइन पर बताया गया कि रोजे की हालत में लोबान सुलगाकर हाथ पर रखकर सूंघते रहने से रोजा चला जाता है। केवड़ा, गुलाब का फूल आदि जिसमें धुआं न हो उसे सूंघा जा सकता है।
खास
रमजान की दूसरी तारीख को पैगंबर मूसा अलैहस्सलाम को तौरात मिली। तौरात धार्मिक पुस्तक है, इसे ईश्वरीय शब्द कहा जाता है। मूसा अलैहस्सलाम के मानने वाले यहूदी कहलाते हैं। वह यहूदी धर्म जूडेज्म के संस्थापक माने जाते हैं।