बदहाल है वाल्मीकि आश्रम
वाल्मीकि आश्रम में सीता अपने बेटों लव और कुश के साथ रहतीं थीं। इस आश्रम का मुख्य द्वार चार साल से जर्जर है। गिरने की आशंका के मद्देनजर इसे बंद कर दिया गया है। दीवारें, छत भी जर्जर हैं। आश्रम के बगल में स्थित लव-कुश जन्मस्थली का भी यही हाल है। श्रद्धालु अन्य संकरे द्वारों से आते-जाते हैं।
सीता रसोई की हालत खराब
वाल्मीकि आश्रम में ही सीता रसोई है। मान्यता है कि सीता माता वाल्मीकि आश्रम में निवास के दौरान इसी रसोई में भोजन बनातीं थीं। उस स्थल पर बनी प्रतीकात्मक रसोई में पुराने मिट्टी के बर्तन रखे हैं। यहां प्लास्टर उखड़ा है। ईंटों में नोना लगा है। इसकी दशा देखकर दर्शनार्थी दुखी हो जाते हैं।
अयोध्या, वाराणसी की तरह जीर्णोद्धार की मांग
पुरातत्व विभाग और नमामि गंगे परियोजना के तहत ऐतिहासिक स्थलों और घाटों पर काम कराया गया। यहां गंगा किनारे घाटों की दशा ठीक नहीं है। घाटों को जाने वाले रास्ते संकरे हैं। बिठूर वासियों ने अयोध्या, वाराणसी की तरह बिठूर के जीर्णोद्धार की मांग की है।
ये हैं दर्शनीय स्थल
बिठूर में वाल्मीकि आश्रम, सीता रसोई, लव व कुश की जन्मस्थली, सीता कुंड, गणेश मंदिर, ध्रुव टीला, ब्रह्मावर्त घाट, ब्रह्मा खूंटी, ब्रह्मेश्वर शिव मंदिर, पत्थर घाट, टिकैतराय शिव मंदिर, रानी लक्ष्मीबाई घाट, श्री संकट मोचन मंदिर, नाना राव पेशवा स्मारक आदि।