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राष्ट्रीय एकात्मकता का प्रतीक है राम मंदिर, भारत नए माहौल में विश्व को बहुत कुछ दे सकता है: राम माधव

Mon, 15 Feb 2021 10:20 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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श्रीराम मंदिर
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कोरोना से झटके के बाद विश्व नए परिवेश में प्रवेश कर रहा है। नई विश्व संरचना हो रही है, जैसे कभी दूसरे विश्व युद्ध के बाद हुई थी। इस बार इस नई विश्व संरचना में चीन अपनी सोच डालना चाहता है, उसे सिर्फ भारत ही रोक सकता है। नई विश्व संरचना में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्र का सशक्त होना जरूरी है, तभी यह संभव है।
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यह बात इंडिया फाउंडेशन के बोर्ड आफ गवर्नर्स के सदस्य और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कही। बात घुमाकर यह भी स्पष्ट कर दिया कि देश को अभी राष्ट्रवादी सरकार की जरूरत है। राम मंदिर राष्ट्रीय एकात्मकता का प्रतीक है। 

वीएसएसडी कालेज में पंडित दीन दयाल शिक्षा समिति के बैनर तले राम माधव की पुस्तक बिकॉज इंडिया कम्स फर्स्ट का विमोचन कार्यक्रम था। राम माधव ने इस मौके पर कहा कि वर्ष 2014 के बाद बड़े परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से काम किया जा रहा है।
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बड़े कामों में उन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया जाना बताया और कहा कि लोगों में अब राष्ट्रवाद की भावना आई है। यह भी बताया कि वर्ष 1963 में सांसदों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए कहा था, पर इसे खोखला करने की ही प्रक्रिया चलती रही।
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फिर नई विश्व संरचना पर लौटते हुए उन्होंने कहा कि जब दूसरा विश्व युद्ध हुआ था तब भारत गुलाम था। उस वक्त भारत का नहीं यूरोप और अमेरिका का योगदान रहा। अगर अब हमने योगदान नहीं दिया तो चीन के प्रभाव वाला वर्ल्ड आर्डर बन जाएगा। वह अपने सोच के अनुरूप विश्व को चलाना चाहता है।

योगदान के लिए राष्ट्र को आर्थिक रूप से समृद्ध होना होगा। भारत के दिशा-निर्देशन में नई दुनिया का निर्माण हो सकता है। इस मौके पर आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अभय करिंदकर ने जियो पॉलिटिकल परिदृश्य और और वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला ने अपनी संस्कृति को अपनाने और प्राचीन पुस्तकों के अध्ययन करने पर जोर दिया। समिति के चेयरमैन वीरेंद्र जीत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

राष्ट्र मजबूत करने के तीन सूत्र
- भारत को संविधान और नियम-कानून का पालन करने वाले राष्ट्र के रूप में चलना पड़ेगा 
- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रामराज्य और डॉ. बीआर अंबेडकर की सोशल डेमोक्रेसी की दिशा में देश को ले जाना 
- अंत्योदय

नए विश्व का एजेंडा 
पर्यावरण, स्वास्थ्य, मानव केंद्रित विकास, हाई तकनीक
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