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बटाईदारों की कौन सुने, मौज में हैं खेत मालिक

Mon, 20 Apr 2015 01:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
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 कुदरत के कहर को झेल रहे किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देकर राहत दी जा रही है। लेकिन उन बटाईदारों की कौन सुनेगा जो बर्बाद फसल की मार के चलते भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
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 ये खेतिहर मजदूर खेत मालिक से बटाई पर खेती लेकर आधी लागत के साथ पूरी मेहनत कर फसल तैयार करते हैं। जब फसल बर्बाद हुई तो राहत चेक केवल खतौनी में दर्ज खेत के मालिकों को बांटी जा रही है। ऐसे में इन खेतिहर मजदूरों को शासन स्तर से राहत पाने का कोई नियम न होने से दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।


 बीते मार्च माह की बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसल में गेहूं, चना, मटर, राई, सरसों, आलू सहित अन्य फसलें बर्बाद हो गईं थी। बारिश व तेज हवाओं के चलते फसलें खेतों में गिर गई। अप्रैल माह में किसान बची-खुची फसलों की कटाई व मड़ाई कर घर ले जाने की जल्दी में लगे थे। तभी दोबारा झमाझम बारिश के चलते फसल बर्बादी की रही-सही कसर भी पूरी हो गई।
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खेतों में फसल बर्बादी का आलम इस कदर रहा कि बढ़ियां पैदावार की उम्मीद लगाए कई किसानों की सदमें से मौत तक हो गई। मार्च, अप्रैल की बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान बटाई पर खेती करने वाले खेतिहर मजदूरों को उठाना पड़ा है। खेतिहर मजदूर खेती को बटाई पर लेकर पूरे परिवार के साथ वर्ष भर कड़ी मेहनत करते हैं। बटाई के खेतों में खाद, बीज व सिंचाई आदि की व्यवस्था करके वर्ष भर के अनाज की व्यवस्था करते हैं।

इस बार इन खेतिहर मजदूरों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। इनके सामने परिवार का पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है।

दूसरी ओर बारिश व ओलावृष्टि के बाद किसानों को राहत देने के लिए शासन स्तर से फसलों की बर्बादी का सर्वे कर राहत सहायता का राजस्व गांवों के हिसाब से वितरण कराया जा रहा है। शासन के नियमों के अनुसार लेखपाल राजस्व विभाग की खतौनी में दर्ज खेत मालिकों को ही राहत सहायता चेक का वितरण कर रहे हैं। राहत सहायता के हकदार इन खेतिहर मजदूरों की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
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