कुदरत का कहर अन्नदाताओं पर थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को जिले
में दोपहर से शुरू हुई बारिश फसलों पर कहर बनकर बरसे। तेज बारिश के चलते
खेतों में गेहूं के गट्ठे व अन्य फसलें पानी से लबालब हो गई। वहीं मूंग,
चना, मटर, राई, सरसों, खरबूजा सहित अन्य फसलों के खेत पानी से भरे नजर आए।
किसान खेतों से पानी निकालकर फसलें बचाने के प्रयास में लगे रहे।
जिले
में मार्च से हो रही झमाझम बारिश के चलते रबी फसलों गेहूं, चना, अरहर, राई,
सरसों, मटर, आलू सहित अन्य की बुवाई करने वाले किसानों की मुसीबतें कम
होने का नाम नहीं ले रही हैं।
बताते चलें कि मार्च में जोरदार बारिश व तेज
हवाओं के चलते किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। फसल
बर्बादी दंश झेल रहे कई किसान इस सदमे से असमय काल के गाल में समा चुके
हैं। वहीं अप्रैल में किसान बची-खुची फसलों को किसी तरह से बचाने के लिए
खेतों में गेहूं की कटाई में परिवार सहित लगे हुए हैं। किसानों को जल्दी थी
कि किसी तरह से बची फसल उनके घरों तक पहुंच जाए।
वहीं रविवार को दोपहर
बाद शुरू हुई झमाझम बारिश के चलते खेतों में कटाई का काम बंद हो गया। तेज
बारिश के चलते गेहूं, खरबूजा, राई, सरसों, मूंग, चना, मटर व अन्य सब्जी
फसलों के खेत पानी से लबालब भरे नजर आए।
किसान खेतों में पानी निकालने की
जुगत करते नजर आए। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम
वैज्ञानिक डा. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि दक्षिणी-पूर्वी हवाएं चलने से
आसमान में बादल छाए रहेंगे।
रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 27.06 डिग्री
सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 20.03 डिग्री सेल्सियस रहा है। फिलहाल 15 अप्रैल
तक बारिश होने की संभावना बनी है।