कानपुर देहात। जनपद में बृहस्पतिवार रात से रुक-रुककर बारिश होती रही। शुक्रवार सुबह आठ बजे तक औसतन आठ मिमी बारिश रिकार्ड की गई। यह बारिश धान की फसल के लिए संजीवनी है जबकि बाजरा, मक्का व तिल की फसलों को इससे नुकसान है। मौसम वैज्ञानिकों ने आगामी पांच दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं।
मौसम वैज्ञानिक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जता रहे थे। इसका असर बृहस्पतिवार रात में दिखा। गरज-चमक और हवा के साथ हल्की बारिश शुरू हुई। रुक रुक कर पूरी रात बारिश हुई तो शुक्रवार सुबह से लेकर देर रात तक बारिश जारी रही। इसके चलते अधिकतम तापमान का पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। यह 25 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया जो सामान्य से 8.4 डिग्री सेल्सियस कम रहा। बृहस्पतिवार रात में न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। यह सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस कम रहा। जिले में सबसे अधिक 11 मिमी बारिश मैथा तहसील क्षेत्र में रिकार्ड की गई। इसके बाद अकबरपुर तहसील क्षेत्र में 10 मिमी बारिश हुई।
रसूलाबाद तहसील क्षेत्र में आठ मिमी और सिकंदरा तहसील क्षेत्र में सात मिमी बारिश हुई है। डेरापुर व भोगनीपुर तहसील क्षेत्र में छह-छह मिमी बारिश हुई है। अकबरपुर व मैथा तहसील क्षेत्र में खेतों में जलभराव हो गया। इसकी वजह से बाजरा, मक्का, व तिल की फसलों में नुकसान है। यदि मौसम नहीं खुला तो इन फसलों की जड़े सड़ने का खतरा बना है। इधर बाजरा की फसल पुष्प अवस्था में है।
बारिश से फूल गिरने से बाली में दाने नहीं आएंगे और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। तेज हवा में फसल गिरने पर भी नुकसान हो सकता है। इधर खेत में मक्का की फसल पक चुकी है ऐसे में बारिश में भुट्टे भीगने से खराब होने की आशंका बनी है। सीएसए के कृषि तकनीकी अधिकारी डॉ. अजय मिश्र ने बताया कि आगामी पांच दिनों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहेंगे। स्थानीय स्तर पर गरज चमक और तेज हवाएं चलने के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।
.....................
अब नहीं करनी पड़ेगी धान की सिंचाई
बारिश से धान की फसलों में सिंचाई की जरूरत पूरी हो गई है। इससे किसानों की फसल लागत बच गई। इधर पत्ती लपेटक कीट से भी फसल को छुटकारा मिल गया है। इससे कीटनाशक छिड़काव भी बच गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर खलील खान ने बताया कि धान की फसल के लिए बारिश फायदेमंद है। पत्ती लपेटक कीट के प्रभाव से धान की फसल में पत्तियां पीली पड़ने लगी थीं। अब बारिश होने से इस कीट से छुटकारा मिला गया है।
.................
खेत में जलभराव हो तो निकाल दे पानी
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर खलील ने बताया कि खेत में पानी भरने की स्थिति में बाजरा, उर्द व तिल की फसल में नुकसान है। बचाव के लिए खेत में जल निकासी दुरुस्त रखें। उन्होंने बताया कि बाजरा की फसल में फूल आ रहा है। बारिश के चलते यह फूल झड़नेे से उत्पादन पर असर पड़ेगा। जबकि तना छेदक कीट का प्रभाव भी पड़ सकता है। जबकि मक्का की पकी फसल में बारिश से नुकसान है। उन्होंने कहा यदि कई दिन तक इसी तरह रुक-रुककर बारिश होती रही तो धान को छोड़कर अन्य फसलों में नुकसान है।