तिलक हाल में प्रेस वार्ता करती कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक साथ में संदीप शुक्ला
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कानपुर। नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की जांच में आरोपी बनाए गए कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिए कांग्रेस लामबंद हो गई है। इसके विरोध में पार्टी देशव्यापी कार्यक्रम कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को महानगर पहुंचीं पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में यदि जेल जाना पड़ा तो भी राहुल गांधी पीछे नहीं हटेंगे। कहा कि हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और जीतेंगे।
पार्टी कार्यालय तिलक हॉल में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि अभी कुछ समय पहले ही राहुल गांधी ने उस जेल का वीडियो देखा था, जहां पं. जवाहर लाल नेहरू रहे थे। उसे देख कर उन्होंने कहा था कि अब मुझे भी जेल जाना पड़ सकता है, लेकिन हम कानूनी सहारा लेंगे और जीतेंगे। रागिनी ने नेशनल हेराल्ड और मनी लाॅन्डि्रंग के मामलों पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि, हम दो तरीके से लड़ाई लड़ेंगे। पहला कानूनी सहारा ले रहे हैं और दूसरा अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए देशभर के 57 प्रमुख शहरों में जाकर मीडिया के जरिए लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। बताया कि इस मामले में सड़क, सदन, संसद और न्यायालय में कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। बताया कि अभिषेक मनु सिंघवी हमारी तरफ से लड़ेंगे।
ईडी का गठन कांग्रेस ने किया फिर इस पर सवाल क्यों के जवाब में उन्होंने कहा कि ईडी का गठन भ्रष्टाचार रोकने के लिए किया गया था, लेकिन यहां इस कानून का गलत तरीके से प्रयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गुजरात और बिहार में मजबूत हो रही है। पीएम मोदी और अमित शाह को यही डर सताने लगा है। इसलिए ईडी का दुरुपयोग शुरू कर दिया है। कहा कि कांग्रेस ने 2002 से 2011 के बीच नेशनल हेराल्ड संस्था को बचाने के लिए बैंक चेक के माध्यम से छोटी-छोटी किस्तों में 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया। खराब स्थिति की वजह से नेशनल हेराल्ड के कर्मियों को वेतन मिलने में देरी हुई। ऐसे में मनी लॉन्डि्रंग साबित कर पाना उनके लिए टेढ़ी खीर है।
रागिनी ने बताया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक 5,422 केस ईडी ने रजिस्टर किए, जिसमें 95 प्रतिशत विपक्षी नेताओं पर केस किए हैं। उसमें से जो पांच प्रतिशत जाकर भाजपा में मिल गए तो वे वहां पवित्र हो गए। मोदी सरकार ने ईडी को अपना इलेक्शन डिपार्टमेंट बना लिया है जो बार-बार प्रतिशोध के लिए इसका दुरुपयोग कर रही है। हालांकि पंजीकृत मामलों में सिर्फ एक प्रतिशत को ही सजा मिली है।