पड़ताल
-दो से छह हजार में मिल जाती हर मर्ज की दवा, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी ठीक करने का करते दावा
- शहर से ग्रामीण क्षेत्रों में फैला मकड़जाल
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। नीम-हकीम खतरे की जान। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में हाईस्कूल-इंटर फेल नीम-हकीम मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मरीज की नब्ज पकड़ कर हर मर्ज, यहां तक कि जानलेवा कैंसर को भी जड़ से खत्म करने का 100 फीसदी दावा करते है।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर ऐसे नीम-हकीम अपने तंबू सजा रखे है। मेडिकल साइंस जिन बीमारियों को सही करने का शत-प्रतिशत दावा नहीं करता, उन्हें यह लोग आसानी से ठीक करने की बात कहते है। जड़ी-बूटी के नाम पर स्टेरॉयड खिलाकर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है।
जिम्मेदार विभाग इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। शहर के अतिरिक्त बकेवर, भरथना, ऊसराहार, जसवंतनगर, चकरनगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में भी इन तंबू वाले दुकानदारों का बोलबाला है। शुक्रवार को कुछ एक झोलाछापों से असाध्य बीमारी के इलाज को लेकर पूछताछ की गई तो सभी ने मोटा पैकेज बताकर 100 फीसदी इलाज का दावा किया गया।
सीन-एक
सवाल : एक महिला की बच्चेदानी में ट्यूमर है, क्या इलाज संभव है।
नीम-हकीम: हां, शर्तिया इलाज हो जाएगा, 100 फीसदी ठीक भी हो जाएगा।
सवाल: अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बच्चेदानी में बड़ी गांठ बताई है, कैंसर का शक है।
नीम-हकीम: कोई परेशानी नहीं, एक माह दवा चलेगी, बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
सवाल: महिला मरीज को लेकर कब आना है।
नीम-हकीम: कभी भी ले आओ, हम नब्ज पकड़कर सब पता कर लेंगे।
सवाल : अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लानी होगी क्या।
नीम-हकीम: नहीं जांच रिपोर्ट की कोई जरूरत नहीं है।
सवाल: कितना पैसा लगेगा और कितने समय में ठीक हो जाएगा।
नीम-हकीम: एक माह का समय लगेगा और 5000 रुपये की दवा होगी।
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सीन- दो
सवाल: मर्दाना कमजोरी की शिकायत है, क्या करना होगा।
नीम-हकीम: आपकी उम्र क्या है, समस्या कितनी पुरानी है।
जवाब: उम्र करीब 40 वर्ष है और यह शिकायत बीते एक माह से है।
नीम-हकीम: ठीक है दवा बन जाएगी, करीब दो माह तक दवा खानी होगी।
सवाल: दवा में क्या मिलाते है।
नीम-हकीम: हिमालय की जड़ी-बूटी पीसकर देते है, 100 फीसदी असर करेगी।
सवाल: कितना खर्चा आ जाएगा।
नीम-हकीम: 20 दिन की दवा लगभग दो हजार की आएगी।
सवाल: दवा बहुत महंगी है, कुछ कम कर दीजिए।
नीम-हकीम: दवा खुद ही तैयार करनी पड़ती है। कम नहीं हो पाएगा।
वर्जन
सड़क के किनारे तंबू लगाकर जड़ी-बूटियों से इलाज करने वाले नीम-हकीम के खिलाफ विभाग पहले भी कार्रवाई करता रहा है। जल्द अभियान चलाकर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मरीजों व तीमारदारों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह सरकारी अस्पताल या फिर पंजीकृत क्लीनिक से ही दवाएं लें। झोलाछाप के चक्कर फंसकर मर्ज को बढ़ाने का प्रयास न करें। - लोकेश कुमार सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी