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UP: बच्ची के दुष्कर्मी को मौत आने तक जेल में रखने की सजा, अधेड़ ने मासूम से दरिंदगी के बाद कर दी थी हत्या

Sat, 01 Oct 2022 08:21 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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40 साल के अधेड़ ने तीन साल की विकलांग बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म किया और हत्या कर दी थी। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट योगेश कुमार ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए दोषी रिक्शा चालक को मौत आने तक जेल में ही बंद रखने के आदेश दिए हैं। दोषी पर 60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है इससे 50 हजार रुपये पीड़िता के पिता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे।
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बाकरगंज चार राड चौराहे पर पीड़िता की मां की चाय की दुकान थी। बाबूपुरवा खटिकाना निवासी रिक्शा चालक सुरेश अक्सर वहां चाय पीने आता था और तीन साल की विकलांग बेटी को खिलाने के बहाने टॉफी आदि दे देता था। 5 जून 2015 को विकलांग बेटी घर से गायब हो गई थी। 6 जून को लोको साउथ कालोनी पटरी के पास उसका शव मिला था।

तब पिता ने रेलबाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विशेष लोक अभियोजक चंद्रकांत शर्मा, गंगा प्रसाद यादव व एडीजीसी विवेक शुक्ला ने बताया कि सुरेश के खिलाफ हत्या, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से पीड़िता के माता-पिता व बहन समेत दस गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने दोषी सुरेश को मौत तक जेल में रखने का आदेश सुनाया है।
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फांसी की मांग पर मिला कठोर दंड
विशेष लोक अभियोजक चंद्रकांत शर्मा ने कोर्ट में तर्क रखा कि ऐसे लोग बच्चियों के जीवन और समाज के लिए खतरा हैं। विकलांग बच्ची के साथ किए गए घिनौने कृत्य के लिए दोषी को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेश शर्मा ने दोषी के सात साल से जेल में बंद होने, गरीब होने का तर्क देते हुए रहम की गुहार लगाई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोषी को कठोर दंड देते हुए उम्रभर जेल में ही रखने का आदेश सुनाया।
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