दूध में मिलावट का दोष सिद्ध होने पर एडीजे प्रथम ने गुरुवार को दूधिये को एक साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने 40 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। फैसला 18 साल बाद आया है। अभियोजन अधिकारी अवधेश सिंह के अनुसार 18 मई 1999 को खाद्य निरीक्षक रामाधार पाल ने कछौना कसबे के स्टेशन रोड चौराहे पर छापेमार कर दूध की जांच की थी। टीम ने संदेह के आधार पर कसबे के घनश्याम नगर निवासी बाबू के दूध का नमूना भरा था।
जन विश्लेषण प्रयोगशाला लखनऊ में हुई जांच में दूध में मिलावट पाई गई। स्वास्थ प्राधिकारी ने एडीजी प्रथम अभय प्रताप सिंह की अदालत में मुकदमा दायर किया था। अभियोजन पक्ष की दलीलों, प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी रामभजन को दूध में मिलावट करने का दोषी करार दिया। अदालत ने मिलावटखोरी में रामभजन को एक साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी पर 40 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
एक महीने में तीसरी सजा
मिलावटखोरी में एक महीने में तीसरी सजा सुनाई गई है। 7 मार्च को एडीजे प्रथम की अदालत ने दूध में मिलावट करने पर मल्लावां के दारापुर निवासी रामभजन को छह महीने की सजा सुनाई थी और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। 29 जून 1999 को मुख्य खाद्य निरीक्षक वीपी चौरसिया ने बिलग्राम चौराहे पर दूध का नमूना भरकर जांच के लिए जन विश्लेषण प्रयोगशाला लखनऊ भेजा था। जांच में दूध मिलावट पाई गई थी। इसी तरह 27 फरवरी कोर्ट ने हरपालपुर के पीलिया तिराहा स्थित गणेश दत्त मिश्र व्यापारी को बेसन में खसरी मिलने पर एक साल कैद और तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बेसन का नमूना 15 जुलाई 2000 को खाद्य निरीक्षक ने भरा था।