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Kanpur News: मनोचिकित्सक का कमरा बंद, आई सर्जन की कुर्सी रही खाली

Fri, 17 Nov 2023 12:43 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की आए दिन लापरवाही देखने को मिलती है। इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है। गुरुवार को आई सर्जन और मनोचिकित्सक डॉक्टर ओपीडी में नहीं पहुंचे तो वहां मरीजों को वापस किया गया।
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कहने को जिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज बन चुका है, लेकिन सुविधा के नाम पर अभी भी मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नियुक्ति के बाद से प्राचार्य ने सिर्फ एक दो बार ही अस्पताल का निरीक्षण किया होगा। मेडिकल कॉलेज में 41 जूनियर रेजिडेंट होने के बावजूद एक दिन में सिर्फ 10 ही आते हैं। जो एक दिन आ जाता, वह अगले एक-दो दिन तक अवकाश पर रहता, लेकिन हाजिरी रजिस्टर में हर दिन डॉक्टरों के हस्ताक्षर रहते हैं। गुरुवार को अस्पताल में मनोचिकित्सक की ओपीडी बंद रही, जबकि आई सर्जन की ओपीडी में वार्ड ब्वॉय मरीजों को दवा देता हुआ दिखाई दिया। मनोचिकित्सक के ओपीडी में पहुंचे एक मरीज के साथ युवक ने बताया कि मरीज चलते-चलते गश खाकर गिर जाता है। रात में उसे नींद ही नहीं आती। इसकी दवा लेने के लिए मनोचिकित्सक के पास आया था, लेकिन वह मिली नहीं। इसी तरह आई सर्जन की ओपीडी में डेरापुर कस्बा की सुनीता पहुंची तो वार्ड ब्वाय मिला तो सुनीता ने वार्ड ब्वॉय को पूरी समस्या बताई तो उसने डिब्बे से एक आई ड्रॉप निकालकर मरीज को दे दी। जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. खालिद रिजवान ने बताया कि अनुपस्थित डॉक्टरों से जवाब तलब किया जाएगा।
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अनियंत्रित हुए दलाल, ओपीडी में किया कब्जा
जिला अस्पताल की ओपीडी में दो माह की सख्ती के बाद फिर से मेडिकल स्टोर और निजी पैथालॉजी संचालकों का कब्जा हो गया है। ओपीडी के बाहर संचालक खड़े रहते और कमीशनबाजी के चक्कर से डॉक्टर भी मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं। इसके बाद मरीज को लेकर दलाल सीधा मेडिकल स्टोर से दवा खरीदवा देते।
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जांच कराने से लेकर इलाज कराने में रही मारामारी
दीपावली की छुट्टी के बाद गुरुवार को ओपीडी में भीड़ अधिक रही। करीब 900 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे। पर्चा काउंटर पर भीड़ अधिक रहने के कारण लोगों को पर्चा बनवाने से लेकर अस्पताल की ओपीडी तक पहुंचने में आधे से एक घंटे का समय लगा। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर मरीज पेट रोग से संबंधित, बुखार, सर्दी जुकाम व शरीर में एलर्जी के रहे। इस दौरान जब डॉक्टर ने देखने के बाद जांच लिखी तो उन्हें घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ा। ओपीडी के मुताबिक करीब 200 से अधिक लोगों को पर्चे पर जांचे लिखी गई। जिसमें से दोपहर 12 बजे तक पैथालॉजी में पर्चे जमा कर 129 लोगों की जांच की गई थी। इधर काफी मरीज बिना जांच कराए ही लौट गए।
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