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कानपुर: आयुध निर्माणियों का निजीकरण रोका था जॉर्ज फर्नांडीज ने, ये भी है खास

Wed, 30 Jan 2019 12:29 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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आयुध निर्माणियों का निजीकरण रोका था जॉर्ज फर्नांडीज ने
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केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में रक्षा मंत्री रहने के बावजूद जॉर्ज फर्नांडीज ने आयुध निर्माणियों को निजी क्षेत्र में देने का भरपूर विरोध किया था। उनका विरोध रंग लाया और सरकार ने ऐसे प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
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निजीकरण का विरोध कानपुर से ही शुरू हुआ था। भारतीय मजदूर प्रतिरक्षा संघ व दूसरे संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने दिल्ली भी गया था। तब जॉर्ज ने आयुध निर्माणियों के संबंध में एक बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने आदेश जारी किया था कि प्रतिरक्षा से जुड़े उत्पादों को बाहर से खरीदने से पहले सेना को आयुध निर्माणी प्रबंधन से एनओसी लेनी होगी। उन्होंने शहर की आयुध निर्माणियों का निरीक्षण किया और मजदूर संघों से मिलने के बाद निर्माणियों के निजीकरण का प्रस्ताव खारिज कर दिया था।

प्रतिनिधिमंडल के रूप में उनसे मिलने गए संगठन पदाधिकारियों में शामिल भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के उपाध्यक्ष साधू सिंह बताते हैं कि दिल्ली में जब उनसे पहली बार मुलाकात हुई तो लगा किसी सामान्य व्यक्ति से मिल रहा हूं। भारी उद्योग मंत्री के रूप में वर्ष-1978 में वे स्वदेशी कॉटन मिल में हुए बवाल के बाद यहां पहुंचे थे। बवाल में 11 कर्मचारियों और तीन अधिकारियों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद फर्नांडीज ने स्वदेशी की सभी इकाइयों को एनटीसी (नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन) में शामिल करने का आदेश जारी किया था। हिंदू मजदूर किसान पंचायत के तत्कालीन प्रांतीय अध्यक्ष गणेश दीक्षित ने बताया कि जॉर्ज उनकी पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। मजदूरों के नेता के रूप में वे कई बार कानपुर आए।
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आयुध निर्माणियों का निजीकरण रोका था जॉर्ज फर्नांडीज ने
- रक्षा मंत्री के रूप में आयुध निर्माणियों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उसमें काम करने वाले कर्मचारियों को उनका अधिकार हासिल हो, इसका ध्यान रखते थे। उन्होंने आयुध निर्माणी को प्राइवेट हाथों में जाने से बचाया था।
- मुकेश सिंह, महासचिव भारतीय प्रतिरक्षा संघ

- देश के रक्षामंत्री के रूप में जॉर्ज फर्नांडीज ने शहर की सभी आयुध निर्माणियों का दौरा किया था। यह उस समय की बात है, जब निर्माणियों को निजी हाथों में देने की बात तेजी से उठी थी। उसके बाद कर्मचारियों ने इस मुद्दे के विरोध में अपना विरोध राष्ट्रीय स्तर पर जताया। फर्नांडीज के पास इस मसले के जाने के बाद उन्होंने मजदूरों की बातों पर अमल करते हुए निजीकरण को खारिज कर दिया।
- सुखदेव मिश्रा भारतीय मजदूर संघ केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य

- भारी उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने कानपुर की कपड़ा मिलों को लेकर हमेशा चिंता जाहिर की। स्वदेशी कॉटन मिल में हुई घटना के दौरान जब वे शहर आए तो उन्होंने अधिकारियों के बजाय पहले कर्मचारियों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ राय-मशविरा किया था।
- साधू सिंह, उपाध्यक्ष भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ
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