यूपी के उरई जिला कारागार में एक विचाराधीन बंदी ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली। देर रात उसने बैरक के बाथरूम में खुद को आग लगा ली। उसकी चीख सुनकर बंदी रक्षक पहुंचे तो उसे आग की लपटों के बीच देखकर उनके होश उड़ गए। बंदी रक्षकों व कैदियों ने किसी तरह आग पर काबू पाया और जेल अधीक्षक को सूचित करते हुए उसे अस्पताल ले जाने लगे। इसी बीच रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
शहर के मोहल्ला राजेंद्र नगर निवासी मूलचंद (55) पुत्र शिवदीन के बेटे मनीष ने बीती 22 मार्च को घर में खुद को आग लगा ली थी। एक सप्ताह बाद उसकी झांसी में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मनीष की पत्नी किरन देवी ने अपने ससुर मूलचंद, सास रामश्री व एक अन्य व्यक्ति पर पति को जलाकर मारने का आरोप लगाया था। इस मामले में मूलचंद्र को पुलिस ने 10 दिन पूर्व ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि उसकी पत्नी उरई से बाहर थी। रविवार की देर रात मूलचंद ने जेल में बैरक में बने बाथरूम में जाकर खुद को आग लगा ली।
आग की लपटे तेज होते ही जब वह सहन नहीं कर पाया तो उसकी चीख निकल गई। आवाज सुनकर बैरक में बंद अन्य कैदी दौड़कर पहुंचे तो उसे आग की लपटों के बीच देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। उधर से बंदी रक्षक दौड़ पड़े। जल्दी से उन्होंने बैरक खोल कर सभी कैदियों को बाहर निकाला और कैदियों की मदद से किसी तरह आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक मूलचंद बुरी तरह जल चुका था।
बंदी रक्षकों ने यह सूचना जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा को दी और आनन फानन में मूलचंद को जिला अस्पताल के लिए लेकर निकले, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत होते ही जेल प्रशासन सकते में आ गया। वहीं यह खबर जब मूलचंद के परिजनों व रिश्तेदारों को पता चली तो वह जिला अस्पताल पहुंच गए। शव को देखकर मूलचंद की पत्नी रामश्री बेहोश हो गई। रिश्तेदारों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है।