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उम्रकैद की सजा काट रहे लुंजी को आखिर किसने दी ‘मौत की सजा’?

Sat, 03 Jun 2017 08:09 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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डकैती के मुकदमे में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी को आखिर किसने ‘मौत की सजा’ दे दी इस सवाल का जवाब किसी के भी पास नहीं है। फर्रुखाबाद के केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में शुक्रवार को निर्माणाधीन बैरक के पिलर में एक कैदी का शव अगौछे से बने फंदे पर लटकता मिला। इस घटना के बाद से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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कानपुर बिल्हौर के उत्तरी गांव निवासी लुंजी पुत्र राधेश्याम को कानपुर देहात की कोर्ट में धारा 396 के जुर्म में वर्ष 2011 में उम्रकैद की सजा दी गई थी। वर्ष 2014 में उसे कानपुर देहात की जिला जेल से केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ लाया गया था। उसे जेल प्रशासन ने सर्किल नंबर एक की बैरक नंबर दो में रखा था। शुक्रवार की दोपहर निर्माणाधीन बैरक के एक पिलर में अंगौछे से बने फंदे पर लुंजी का शव लटकता मिला। वहां मौजूद मजदूरों व अन्य लोगों ने इसकी सूचना जेल अधीक्षक बीपी त्रिपाठी को दी। वह जेल पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। तब तक कैदी दम तोड़ चुका था।

फतेहगढ़ कोतवाली पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। सेंट्रल जेल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारा। नायब तहसीलदार चूड़ामणि ने वीडियोग्राफी कराई और पंचनामा भरा। इसके बाद शव को सुरक्षित रखवा दिया गया। जेल अधीक्षक बीपी त्रिपाठी ने बताया कि कैदी लुंजी ने निर्माणाधीन बैरक के पिलर में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इस घटना की जानकारी उसकी बहन रामेश्वरी देवी को भेज दी गई है।
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