सीएमआरएस पिछले महीने कर चुके हैं ट्रायल
यूपीएमआरसी कॉरिडोर-1 के तहत आईआईटी से मोतीझील तक नौ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक पर मेट्रो ट्रेनें संचालित कर रहा है। मोतीझील से चुन्नीगंज होते हुए कानपुर सेंट्रल तक पांच भूमिगत स्टेशन तैयार हो गए हैं। इस रूट में ट्रेन चलाने के लिए मेट्रो रेल संरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस) पिछले महीने ट्रायल कर चुके हैं।
कई बिंदु बन सकते हैं रोड़ा
हालांकि, सेंट्रल भूमिगत मेट्रो स्टेशन में जाने, लौटने के लिए स्थायी सीढि़यां न होने सहित कई बिंदु सीएमआरएस की हरी झंड़ी में रोड़ा बन सकते हैं, ऐसी आशंका जताई गई है। मेट्रो सूत्रों के अनुसार इन्हीं वजहों से उन्होंने अभी तक इन पांच भूमिगत स्टेशनों के बीच मेट्रो की यात्री सुविधाएं शुरू करने की अनुमति नहीं दी है।
24 अप्रैल को आ सकते हैं पीएम
उधर, मेट्रो ने कमियों को पूरा करते हुए जल्द ही सीएमआरएस की क्लीनचिट मिलने की संभावना जताई है। साथ ही प्रधानमंत्री से इन स्टेशनों के बीच ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीएम 24 अप्रैल को यहां आ सकते हैं। वे जनसभा भी कर सकते हैं।
नौबस्ता एलिवेटेड ट्रैक को बर्रा से जोड़ें, रमईपुर तक चलाएं मेट्रो
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के एमडी सुशील कुमार को मेट्रो के विस्तार के निर्देश दिए। उन्होंने एमडी को कॉरिडोर-1 के नौबस्ता मेट्रो स्टेशन को 5.9 किलोमीटर दूर बर्रा-8 में कॉरिडोर-2 से जोड़ने और नौबस्ता से 5.7 किलोमीटर दूर रमईपुर तक मेट्रो चलाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।