परौंख में शौचालय का टूटा दरवाजा और छत पर पड़ा टीनशेड
- फोटो : अमर उजाला
स्वच्छ भारत अभियान को लेकर राष्ट्रपति का गांव परौंख गंभीर नहीं है। गांव में बने शौचालयों में कबाड़ भरा है और लोग खुले में शौच जा रहे हैं। शौचालय निर्माण में भी ग्रामीणों की खास रुचि नहीं है। जबकि, अधिकारी यहां के लोगों को जागरूक करने के लिए चौपाल लगा चुके हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर के ईश्वरीगंज गांव से स्वच्छ भारत अभियान का संदेश दिया। उनके इस संदेश की अवहेलना कर उनके पैतृक गांव परौंख में करीब चार सौ परिवार खुले में शौच जाते हैं। जबकि, जिले को खुले में शौचमुक्त करने का प्रयास चल रहा है। हर घर में शौचालय निर्माण के लिए सरकार 12 हजार रुपये दे रही है।
परौंख में शौचालय के अंदर भरे कंड़े
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सरकारी मानक के अनुसार दो गड्ढ़े खोदकर शौचालय निर्माण में मिलने वाला आधा धन लिया जा सकता है इसके बाद शौचालय का निर्माण पूरा कराते ही उसे शेष धन भी दे दिया जाएगा। कागजी आंकड़ों में गांव में करीब तीन सौ शौचालय बने हुए हैं। अभी हाल ही में पचास शौचालयों के निर्माण के लिए धन दिया गया है। यह निर्माण पूरा होते ही फिर धनराशि दे दी जाएगी।
शौचालय का निर्माण पूरा करने में भी लापरवाही की जा रही है। कुछ में केवल दीवारें बनी खड़ी हैं। कई शौचालयों में सीट नहीं रखी गई हैं। कुछ में छत नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिनके शौचालयों का निर्माण पूरा हो गया है, वे उसमें कंडा और कबाड़ भरे हुए हैं। उसका उपयोग करने के बजाय खुले में शौच जा रहे हैं।
अधिकारियों ने ग्रामीणों को शौचालय निर्माण कराने के साथ उपयोग करने के लिए जागरूक किया है। गांव में चौपाल लगाई जा चुकी है, फिर भी लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रधान पति बलवान सिंह ने बताया कि शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। सात शौचालय बनाए जाने हैं।
इसके साथ गांव में सफाई के लिए चार सफाई कर्मी तैनात होने की बात कही है। डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि धन की कोई कमी नहीं है। गांव में मानक के अनुसार शौचालय का निर्माण कराने वालों को सरकारी मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गांव के लोग शौचालय निर्माण को लेकर जागरूक नहीं हो रहे हैं।