राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद यह मेरी कानपुर की पहली यात्रा है। मैं अपने घर आया हूं। यह मेरा जन्म स्थान है। मैं यहां की मिट्टी में पला-बढ़ा हूं। पहले बीएनएसडी इंटर कॉलेज, फिर डीएवी में पढ़ाई की। शहरवासियों के स्नेह और मां गंगा के आशीर्वाद से इस मुकाम तक पहुंचा हूं। मैं भले ही पूरे देश का राष्ट्रपति हूं, लेकिन मातृ राज्य उत्तर प्रदेश से लगाव कुछ ज्यादा ही रहेगा। मैं आपके बीच रहा हूं, आपका मुझसे भावनात्मक जुड़ाव है। इसलिए आपको भी लगता होगा कि कोविंद भले ही राष्ट्रपति भवन में बैठे हों, पर हम भी किसी राष्ट्रपति से कम नहीं हैं। आपको मेरे से आने से जितनी खुशी हुई है, उससे कहीं ज्यादा मुझे हुई है।
मानसी में दिखी राष्ट्र निर्माण की झलक
राष्ट्रपति स्वच्छता के लिए काम कर रहीं कानपुर की एनसीसी कैडेट मानसी द्विवेदी से बेहद प्रभावित दिखे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मानसी में राष्ट्र निर्माता की झलक दिखती है। हम सबका आशीर्वाद उन्हें मिलेगा तो वह अपने लक्ष्य को अवश्य पा लेंगी। राष्ट्रपति ने सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डा. बिंदेश्वर पाठक, इंडिया सैनिटेशन कोअलिशन की नैना लाल किदवई समेत पुरस्कृत होने वाली विभूतियों के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने प्रदेश सरकार और देश की ओर से उनका अभिनंदन किया।
गंगा की भी सफाई करें
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छता के लिए काम करना सही मायनों में मानवता की सेवा है। ईश्वरीगंज के लोगों ने अपने गांव को खुले में शौचमुक्त कर अनुकरणीय काम किया है। अब गांववासी गंगा की सफाई में भी योगदान दें। इस बार गांधी जयंती पर स्वच्छता के लक्ष्यों को पाना ही सभी का लक्ष्य होना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि गांव के जिन लोगों ने इस कार्य में योगदान किया है, उन्हें देश भर में बैठे लोग देख पा रहे हैं। दूरदर्शन इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कर रहा है। संबोधन के बीच में लोगों ने तालियां बजाईं तो राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह तालियां इसलिए बज रहीं हैं कि लोगों को दूरदर्शन पर दिखाया जा रहा है। जो लोग तालियां नहीं बजा रहे हैं, वह चिंता न करें, उन्हें भी दिखाया जाएगा। इस पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।