- दो शहरों को जोड़ने वाले मेट्रो रूट की तरह होगा परियोजना का स्वरूप
- 20 साल बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई जा रही योजना
- परियोजना की संभावना तलाशने को शासन से मिले निर्देश
दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रेन कॉरिडोर की तरह ही अब कानपुर और लखनऊ के बीच रैपिड रेल चलाने की तैयारी चल रही है। शुक्रवार को शासन की ओर से प्रमुख सचिव आवास एवं नियोजन दीपक कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रैपिड रेल ट्रांजिट परियोजना (आरआरटीएस) की समीक्षा की और संभावना तलाशने के निर्देश दिए।
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मुख्य सचिव परियोजना की अध्यक्षता में शासन स्तर से एक समिति गठित की गई है जिसमें औद्योगिक विकास आयुक्त, प्रमुख सचिव आवास एवं नियोजन, कानपुर और लखनऊ के कमिश्नर, कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण (लीडा) के अपर मुख्य कार्यपालक तथा उच्च स्तरीय विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव सदस्य नामित हैं।
कमिश्नर कानपुर डॉ. राजशेखर इसके नोडल अधिकारी हैं। कमिश्नर ने बताया कि कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन को बेहतर करने के लिए पूर्व में मुख्य सचिव को प्रस्ताव भेजा गया था। बाद में कई बार पत्राचार किया गया। इस प्रस्ताव पर ही शासन की ओर से परियोजना के अध्ययन को मंजूरी मिली है।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमुख सचिव आवास ने प्रस्तावित परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव को इसका प्रस्ताव भेजने को कहा है। उनकी ओर से प्रस्ताव की पेशकश आते ही राइट्स व एनसीआरटीसी जैसी संस्थाओं को परियोजना की संभावना तलाशने और अध्ययन करने के लिए नियुक्त किया जाएगा।
इसका प्रस्ताव तैयार करने में जो भी खर्च आएगा उसका 50 फीसदी यूपीसीडा, 25-25 फीसदी हिस्सा कानपुर विकास प्राधिकरण व लखनऊ विकास प्राधिकरण वहन करेंगे। बैठक में कमिश्नर डॉ. राजशेखर, केडीए वीसी राकेश सिंह, चीफ इंजीनियर चक्रेश सिंह, नीरज श्रीवास्तव मौजूद रहे।
2015 में भी तैयार हुआ था प्रस्ताव
बता दें कि 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश सरकार ने भी 2015 के अंत में दोनों शहरों के बीच आरआरटीएस शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कराया था। उन्होंने इसका जोर-शोर से प्रचार-प्रसार भी किया था, लेकिन यह प्रस्ताव केडीए के दफ्तर से बाहर नहीं निकल पाया।
इसके बाद नई सरकार बनने के बाद भी इस परियोजना को लेकर चर्चा शुरू हुई थी, लेकिन कानपुर में प्रस्तावित मेट्रो रेल परियोजना को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया था। अब चूकि कानपुर की मेट्रो रेल परियोजना शुरू हो चुकी है। ऐसे में सरकार ने लखनऊ-कानपुर के बीच एक बार फिर से आरआरटीएस शुरू करने को लेकर गंभीरता से पहल शुरू कर दी है।
अलग ट्रैक पर दौड़ेगी रैपिड, लागत 30 हजार करोड़ से अधिक
कानपुर से लखनऊ के बीच प्रस्तावित रैपिड ट्रेन का ट्रैक भी अलग होगा। इसके निर्माण में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आने का अनुमान है। वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रमुख सचिव आवास एवं नियोजन दीपक कुमार ने अफसरों से सवाल किया कि लखनऊ से कानपुर के बीच दूरी कम करने के लिए अगले चार साल में एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा।
ऐसे में इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना की क्या जरूरत? इस पर कमिश्नर डॉ. राजशेखर ने कहा कि अगले 20 साल या उसके बाद की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए परियोजना तैयार की गई है। यह कानपुर और लखनऊ के अलावा बीच के शहरों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।
आरआरटीएस के जरिये दोनों शहरों के बीच की दूरी महज 20 से 30 मिनट में पूरी हो सकेगी। उच्च स्तरीय विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव ने समझाया कि किस तरह लखनऊ और कानपुर वास्तविक रूप से जुड़वां शहर के रूप में नियोजित तरीके से विकसित हो सकेंगे। इससे यूपीसीडा, लीडा और केडीए की बड़ी विकास योजनाओं को बल मिलेगा। गंगा बैराज क्षेत्र, ट्रांसगंगा सिटी तेजी से विकसित होगा।
आसान होगा सफर, वाहनों का लोड होगा कम
मंडलायुक्त ने बताया कि इस तरह की योजनाएं भविष्य की जरूरतों के लिए होती हैं। जब लगातार इस पर काम होता रहेगा, तब भी तीन से चार साल तो परियोजना बनने में लग जाएंगे और इतना ही समय इसके निर्माण में। तब दोनों शहरों के बीच सड़कों पर वाहनों की क्या स्थिति होगी, इसका आकलन किया जा सकता है। ऐसे में रैपिड रेल कम समय में दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करेगी। सड़कों पर वाहनों का लोड कम होगा। हादसों में भी कमी आएगी। नए उद्योग विकसित होंगे।