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- पिछले वर्ष 12 जुलाई तक 26 से 27 फीसदी आलू की निकासी की जा चुकी थी
- इस वर्ष अब तक महज 22 से 23 फीसदी आलू शीतगृहों से थोक बाजार भेजा गया
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। आलू का भाव हर दिन मंडियों में बढ़ रहा है। ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए किसान शीतगृहों से अपनी उपज नहीं निकाल रहे हैं। इससे भाव रोजाना बढ़ रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि दाम ज्यादा बढ़े तो सरकार बाहर से आलू मंगवा सकती हैं, ऐसी स्थिति में स्थानीय बाजार में आलू के दाम भविष्य में गिर सकते हैं। इससे किसानों को नुकसान हो सकता है।
जिले में रोजाना 10 हजार मीट्रिक टन आलू की निकासी हो रही है। जिले में आलू की पैदावार अच्छी होती है और इसका काफी भंडारण भी किया गया है। अभी तक शीतगृहों से सिर्फ 23 फीसदी आलू की निकासी की गई है। औसतन सभी जिलों में यही स्थिति है। इसकी वजह से दाम सातवें आसमान पर पहुंच रहे है।
आलू आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। आलू की चिपसोना, देवापहाड़ी, पुखराज, हॉलैंड, खयाती, 37-97 समेत कई किस्में हैं। हाल यह है कि खयाती जैसे साधारण किस्म का आलू वर्तमान में 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है। जिले के 54 शीतगृहों में आलू का कुल भंडारण 5,19,498 मीट्रिक टन हुआ है।
शुक्रवार तक महज 1,19,576 मीट्रिक टन आलू की निकासी की गई है। जबकि पिछले वर्ष 12 जुलाई तक 26 से 27 फीसदी आलू की निकासी की जा चुकी थी। इससे जाहिर है कि किसान व व्यापारी आलू के भाव बढ़ने की संभावनाओं को लेकर इसे शीतगृहों में ही रोक रहे है।
यह भी एक वजह कि आलू पर महंगाई बढ़ रही है। वर्तमान में फुटकर दर 35 रुपये तक पहुंच गई। किसान अनमोल चंद्र ने बताया कि आलू व्यापारी किसानों से आलू खरीदकर स्टॉक कर लेते है और फिर कीमतों के बढ़ने का इंतजार करते है।
इस बार भी ऐसा ही हुआ है अब व्यापारी आलू की निकासी करके दूसरे प्रदेशों में भेज रहे है इससे कीमतों में और इजाफा हो रहा है।
वर्जन
आलू का बाजार भाव इस समय अच्छा चल रहा है। किसान शीतगृह से अपना आलू निकाल कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। आने वाले समय में बाजार में अन्य प्रदेशों का आलू आना शुरू हो जाएगा, जिसके आलू के भाव में गिरावट हो सकती है। किसान के हित को ध्यान में रखते हुए भंडारण करने वाले कृषकों से लगातार संपर्क करके आलू निकासी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। श्याम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी