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Kanpur News: बारिश से आलू व सरसों की फसल को नुकसान, झुलसा का खतरा

Mon, 04 Dec 2023 10:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। बारिश से किसानों को कहीं फायदा तो कहीं नुकसान है। खेतों में पानी भरा रहने पर अधिक नुकसान की आशंका है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू व सरसों की फसल को नुकसान है। आलू के खेत में पानी भरा रहा और मौसम न खुला तो झुलसा रोग लग सकता है। जबकि सरसों में फूल गिर जाने से उत्पादन प्रभावित होगा। 30-35 दिन पहले बोया गेहूं उग गया है। ऐसे खेत में पानी भरा रहा तो जड़े सड़ने का खतरा है।
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मौसम वैज्ञानिक लगातार बारिश की संभावना जता रहे थे। बीते गुरुवार को हुई बारिश से गेहूं की बोआई के काफी किसान पिछड़ गए हैं। इधर अब रविवार देर रात से हुई बूंदाबांदी के बाद सोमवार सुबह से रुक रुक कर शाम तक हुई बारिश से 30-35 दिन के गेहूं के खेत में जलभराव रहने से जड़े सड़ने का खतरा बना है। जबकि हवा संग हुई बारिश से सरसों की फसल में नुकसान है। सरसों में इस समय फूल अवस्था है। बारिश से फूल गिरने से उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। इसको लेकर किसान चिंतित हैं। अकबरपुर, रूरा, राजपुर, शिवली, रनियां आदि क्षेत्र में हवा संग हुई बारिश से सरसों की फसल खेतों में गिर गई है। जबकि अरहर की फसल भी गिरी है। इससे पैदावार प्रभावित होेने की आशंका है। सरसों, आलू के साथ पहले गेहूं बो चुके किसान भी अब मौसम खराब रहने और बारिश होने से फसल नुकसान को लेकर चिंतित हैं। राजपुर संवाद के अनुसार राजपुर के किसान वीर सिंह, देवनपुर के किसान दयाराम, शिवकुमार, भारत सिंह आदि ने बताया कि बीहड़ पटटी के गांवों में नहरों में पानी न होने से इस बार पलेवा में देरी हुई है। ऐसे में बारिश ने अब फसलों की गणित बिगाड़ दी है। तेज हवाओं के साथ बारिश से सरसों की फसल को नुकसान है। दलीप नगर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि हवा संग बारिश से फूल अवस्था में तिलहनी फसल को नुकसान है। आलू के खेत में जलभराव व मौसम दो तीन दिन तक इसी तरह बना रहने पर झुलसा रोग का खतरा है। गेहूं की उगी फसल में यदि पानी भरा है तो किसान जल निकासी का प्रबंध करें। इससे जड़े सड़ने से बच जाएगी।

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चना, मटर की फसल में पानी भरा तो निकाल दें
दलीप नगर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि चना व मटर की फसल में अभी फूल नहीं है। लेकिन खेत में पानी भर जाए तो जल निकासी प्रबंध तत्काल करने की जरूरत है। इससे फसल सड़ने से बच जाएगी। संवाद
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ठंडी हवाएं चलने से मौसम हुआ सर्द

ठंडी हवाएं चलने से मौसम सर्द हो गया है। अब लोग गर्म कपड़े पहन कर और सिर ढककर ही निकल रहे हैं। जबकि रात में गलन हो रही है। फिलहाल 48 घंटे इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान है। कई जगह लोगों ने अलाव जलाए। सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि चक्रवाती हवाओं की वजह से यह स्थित बनी है। घने बादल छाए रहेंगे। तेज हवाएं चलने के साथ स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान ठंडी हवाएं चलने से मौसम सर्द रहेगा।


फोटो-5 अकबरपुर क्रय केंद्र पर रुकी धान खरीद
फोटो-6 बारिश से भीगा खुले में रखा धान

फोटो- 7 अकबरपुर क्रय केंद्र पर भीगा किनारे पर खुला धान
बारिश में भीग गया खुले में रखा खरीदा गया व किसानों का धान
-बारिश से थमी सरकारी खरीद, क्रय केंद्रों पर सन्नाटा
संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर देहात। सरकारी क्रय केंद्रों पर शेड फुल हो गए हैं। इसकी वजह से अब खरीदा गया धान भी खुले आसमान के नीचे रखा है। जबकि तौल के लिए लाया गया धान भी किसान खुले में एकत्र किए हैं। बारिश से क्रय केंद्रों पर खरीदा गया और किसानों का धान भीग गया। मौसम खुला नहीं तो भीगा धान बोरों के अंदर अंकुरित होकर खराब होने की आशंका है।
जिले में 52 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद हो रही है। इसके साथ ही अन्य क्रय केंद्रों पर ज्वार, मक्का व बाजरा की खरीद हो रही है। खरीदे गया धान मिलर्स को चावल बनाने के लिए भेजा नहीं जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन चालान जनरेट करने की व्यवस्था पहली बार लागू की गई है। पोर्टल पर चालान जनरेट नहीं होने से यह स्थिति बनी है। ऐसे में क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान से शेड फुल हो गए हैं। अकबरपुर क्रय केंद्र पर भी खुले में खरीदा गया धान रखा है। जबकि तौल के लिए लाया गया किसानों का धान भी खुले में डंप है। बारिश होने पर किसानों से पॉलीथिन डालकर धान बचाने का जतन किया। लेकिन हवा चलने से खुले हिस्से का धान भीग गया है। जबकि सरकारी खरीदा गया धान भी भीगा है। सोमवार को मौसम खराब होने की वजह से क्रय केंद्र प्रभारी व किसान धान को भीगने से बचाने का जतन करते रहे। रुक -रुक कर बारिश होने से धान की तौल नहीं हो सकी। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि क्रय केंद्रों पर सरकारी धान भीगने से बचाने के लिए तिरपाल से सुरक्षित किया गया है। किसानों ने भी धान ढक दिया है। कुछ किसानों ने लापरवाही की तो उनका धान भीग गया है।
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