गौ सेवक योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही बुंदेलखंड में बद से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर 3.5 लाख गायों की हालत सुधरने की उम्मीद जगी है। उधर, सीएम के आदेश के तहत अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई के बाद अन्ना जानवरों (लगभग सभी गाय) की संख्या और उनकी दुर्दशा बढ़ना तय है। ऐसे में बुंदेलखंड गायों के संरक्षण के लिए खास तौर पर सीएम और उनके अमले की ओर देख रहा है। इस संबंध में कोई कार्य योजना जल्द लागू नहीं हुई तो क्षेत्र में गाय भुखमरी का शिकार हो जाएंगी।
पिछले वर्ष सूखा पड़ने के दौरान बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम मंडल में गौशालाओं की बाढ़ आ गई। तमाम स्वयंसेवी संगठनों ने पशुराहत केंद्र शुरू किए। चारों जनपदों में इस तरह के 96 पशु राहत केंद्र खोले गए। सबसे ज्यादा 33 कैंप महोबा में खुले। हमीरपुर में 31, बांदा में 18 और चित्रकूट में 14 पशु राहत केंद्र खोले गए। लेकिन प्रशासन द्वारा पर्याप्त भूसा-चारे की व्यवस्था न कराए जाने से ज्यादातर कैंप कुछ महीनों बाद ही ठप हो गए। कई गांवों में किसानों ने अपनी फसल बचाने के लिए अन्ना गायों को एक स्थान पर बाड़ा बनाकर रख दिया। लेकिन यहां भी चारा-भूसा का स्थाई इंतजाम न होने से किसानों को अन्ना गायों को छोड़ना पड़ा। हालांकि चित्रकूटधाम में पशुपालन विभाग के अपर निदेशक का कहना है कि सूखा के दौरान पशु राहत कैंपों को 23747 कुंतल भूसा उपलब्ध कराया गया।
जनपदवार अन्ना (छुट्टा) जानवरों की स्थिति ----- ----
बांदा 81495
चित्रकूट 110000
हमीरपुर 70450
महोबा 85000
योग 346945
यह भी जान लें..
पशु चिकित्सा अधिकारी एसके शाक्य के मुताबिक एक गाय के लिए एक दिन में जरूरी आहार करीब 5 किलो भूसा। - जनपद में एक मात्र गोशाला कालपी में वह भी बजट के अभाव में बंद पड़ी है। - किसी भी सांसद और विधायक की ओर से गोरक्षा के नाम पर कोई खर्च नहीं किया गया है।