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पर्यावरण संरक्षण की मुहिम पर पॉलिथीन का धब्बा

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पुखरायां। आज विश्व पर्यावरण दिवस है। लोग पौधे रोपने के साथ उन्हें संरक्षित करने का संकल्प भी लेंगे। इसके साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर चर्चा करके उनके निस्तारण के लिए कार्ययोजना तैयार करेंगे। इस दिन के बाद से फिर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम कहीं खो जाएगी।
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इसका सबसे बड़ा उदाहरण पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाली पॉलिथीन है। यह मनुष्यों व पशुओं की सेहत के साथ फसलों की पैदावार के लिए भी खतरा है। इसके प्रयोग को बैन करने के बाद भी जिले में धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग किया जा रहा है।
पहले के समय में ढाक के पत्तों से बनने वाले पत्तल, कपड़ों के थैले और मिट्टी के बर्तनों का चलन धीरे धीरे अब समाप्त हो चुका है। इनकी जगह पॉलिथीन के थैले, गिलास, कटोरी व थैलियों ने ले ली है। पहले लोग ढाक के पत्तों से बनी पत्तल में भोजन व मिट्टी के बने कुल्हड़ का उपयोग करते थे। पत्तल मवेशियों के चारे के रूप में उपयोग हो जाते थे।
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वहीं मिट्टी के बने बर्तन टूटकर फिर से मिट्टी में ही समाहित हो जाते थे। समय के साथ पॉलिथीन का प्रयोग तेजी से बढ़ा। यह धीरे धीरे मवेशियों से लेकर खेतों तक पहुंचा। पॉलिथीन खेत की मिट्टी में दबकर फसलों को प्रभावित करती है। इसके न गलने से पौधों की जड़ों को मिट्टी से पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। वहीं मवेशियों के पॉलिथीन खा लेने से उनकी मौत भी हो जाती है। पॉलिथीन नालियों में जाकर जल निकासी में बाधक बनती है।
कट रहे पेड़, कम हो रही हरियाली
क्षेत्र में बागों की बहुतायत संख्या थी। अब यहां कुछ छोटे दायरे के बाग बचे हैं। उनकी भी कटान हर साल होती रहती है। इमरती लकड़ी वाले पेड़ों के अलावा सबसे ज्यादा पीपल, बरगद, पाकड़ और नीम के पेड़ों की कटान हो रही है। वायु मंडल को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पेड़ों की कमी एक बड़ा खतरा बनाती जा रही है। इससे क्षेत्र में निरंतर हरियाली कम होती जा रही है।
उपजाऊ धरती को पॉलिथीन बना रही बंजर
पॉलिथीन का बहुतायत मात्रा में उपयोग किए जाने से उपजाऊ धरती बंजर होती जा रही है, जबकि पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारियों की अनदेखी से क्षेत्र में अभी तक इस पर रोक नहीं लग सकी है। जिसका लोग खुलेआम धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। वहीं उत्पादन पर भी रोक नहीं लगाई जा सकी है।
पर्यावरण संरक्षण में किसानों की सहभागिता आवश्यक
किसानों के सहयोग के बिना पर्यावरण का संरक्षण नहीं किया जा सकता है। 68 प्रतिशत किसानों की सहभागिता पर पर्यावरण आधारित है। वहीं किसानों से कहा जा रहा है कि पानी के संचय के लिए बंधियों को ठीक करें और फलदार पौधे रोपित कर उनको संरक्षित करें। ग्रामपंचायत स्तर पर तालाबों की खोदाई कर उनमें पानी जाने का रास्ता और स्वच्छता का इंतजाम कराया जाना चाहिए। जिसमें किसानों की सहभागिता आवश्यक है। - केएन दीक्षित, सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी
पॉलिथीन का पशुओं की सेहत पर विशेष प्रभाव पड़ता है। जिसके खाने से उनकी मौत तक हो जाती है। लोगों को चाहिए कि पॉलिथीन में पशुओं के खाने लायक चीज लपेट कर न फेंके। जरूरी तो यह है कि पॉलिथीन का प्रयोग न करने की शपथ लें। - डॉ. आलोक कुमार, पशु चिकित्साधिकारी
पॉलिथीन जलाने से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए नुकसान देह साबित होता है। इससे निकलने वाले कार्बन के कण आंखों को खराब करते हैं। साथ ही यह सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंच स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं। - डॉ. अनूप सचान, सीएचसी अधीक्षक
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