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गर्मी में डीजल के धुएं से कई गुना बढ़ता है प्रदूषण, अल्ट्रा फाइन कण खून में मिल पहुंचाते हैं नुकसान

Thu, 13 Jun 2019 02:16 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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गर्मी के मौसम में प्रदूषण और अधिक खतरनाक हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल के धुएं से होने वाला प्रदूषण अधिक नुकसानदेह होता है। इससे शरीर में अल्ट्रा फाइन कणों की संख्या बढ़ जाती है। अल्ट्रा फाइन कण (अति सूक्ष्म) सांस के द्वारा फेफड़ों से होकर खून में मिल जाते हैं और हृदय, गुर्दे और लिवर को खराब करने लगते हैं।

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धूल से होने वाला प्रदूषण धुएं की तुलना में कम खतरनाक है। धूल के कणों को मुंह और नाक को कपड़े से ढंक कर कुछ हद तक रोका जा सकता है क्योंकि ये बड़े होते हैं, लेकिन अल्ट्रा फाइन कणों से बचाव का कोई साधन नहीं है।

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कानपुर के मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और सीनियर चेस्ट फिजीशियन प्रोफेसर एसके कटियार ने आईआईटी के सहयोग से अपने एक शोध के हवाले से बताया कि हवा का पहला फिल्टर नाक होता है। जब हवा में आद्रता कम होती है, लू चलती है तो नाक के अंदर की नमी खत्म हो जाती है। ऐसे में अल्ट्रा फाइन कण सांस के माध्यम से अधिक मात्रा में शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

ये प्रदूषण के कण सीधे खून में मिलते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं कचरा आदि जलाने से वातावरण में जहरीली गैस की मात्रा बढ़ती है, यह भी नुकसान करती है लेकिन इससे बचाव के उपाय हैं। सबसे अधिक नुकसान डीजल का धुआं करता है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रा फाइन कणों को फेफड़ों की छन्नियां भी नहीं रोक पाती हैं।
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बड़े कण : पांच से 10 माइक्रॉन
मीडियम कण : 2.5 से पांच माइक्रॉन
फाइन कण : .5 से 2.5 माइक्रॉन
अल्ट्रा फाइन कण : 0.5 माइक्रॉन से कम

जब तक लपट चल रही यह सावधानी बरतें:-
- सुबह तड़के व्यायाम करें, इसके बाद एक्यूआई बढ़ जाता है
- प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए यौगिक क्रियाएं करें
- पौष्टिक आहार लें, मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें
- आम का पना, बेल का शरबत, सत्तू का घोल आदि लें
- पानी अधिक से अधिक पीयें ताकि प्रदूषित तत्व शरीर से बाहर निकलते रहें।
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