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ठंड में प्रदूषण से बढ़ रहे खर्राटे, महिलाओं-पुरुषों में लक्षण अलग-अलग, हार्ट अटैक का खतरा

Fri, 04 Jan 2019 01:39 PM IST
gaurav gaurav यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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ठंड में प्रदूषण के कारण लोगों में खर्राटे की समस्या अधिक हो जाती है। प्रदूषण के तत्व नाक, गले (श्वास नली) और फेफड़ों तक रुकावट पैदा करते हैं। नली में सूजन आ जाती है तो शरीर में ऑक्सीजन का लेवल घटता है और खर्राटे आते हैं। इससे हार्ट और ब्रेन अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
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स्लीप फाउंडेशन के अध्यक्ष सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने पत्रकारों को मेडिकल कॉलेज में बताया कि खर्राटे 40 से 120 डेसीबेल तक ध्वनि पैदा करते हैं। दुनिया का सबसे तेज खर्राटे का साउंड 120 डेसीबेल है। खर्राटों से व्यक्ति को हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक का खतरा तो रहता ही है। इसके साथ ही इससे तलाक के मामले भी बढ़ रहे हैं। फाउंडेशन की ताजा सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने बताया कि शहर में 28 से 55 वर्ष आयु वर्ग के 55 प्रतिशत पुरुषों को खर्राटे आते हैं। इसी आयु वर्ग की 25 प्रतिशत महिलाएं खर्राटे की बीमारी की गिरफ्त में हैं। बता दें कि स्लीप फाउंडेशन प्रदेश भर के ईएनटी विशेषज्ञों का संगठन है।

महिलाओं-पुरुष में लक्षण अलग-अलग
महिलाओं में खर्राटे की बीमारी पुरुषों से अलग लक्षण देती है। महिलाओं को सुबह उठने पर अगर सिरदर्द रहे तो समझना चाहिए कि उसे खर्राटे की बीमारी है। विशेषज्ञों ने महिलाओं में अलग लक्षण की वजह जेनेटिक्स और हार्मोंस बताई है। अक्सर महिलाएं सिर दर्द होने पर माइग्रेन का इलाज कराने लगती हैं। बच्चों में यह दिक्कत नाक में एडीनॉयड ग्रंथि या पॉलिप बढ़ने से हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के संक्रमण काल में खर्राटे अधिक हो जाते हैं। मानसिक तनाव के अलावा ठंडक बढ़ने पर यह दिक्कत बढ़ती है और गर्मी में कम हो जाती है।
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योग, व्यायाम और प्रोटीन युक्त खानपान जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि योग, व्यायाम और प्रोटीन डाइट लेने से खर्राटे की दिक्कत को कम किया जा सकता है। एप्निया हेल्थ इंडेक्स 10 होने पर व्यायाम, यौगिक क्रियाएं शुरू कर देनी चाहिए। इंडेक्स 40 के ऊपर होने पर सीपेप मशीन की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिनका कॉलर साइज 17 इंच से अधिक हो यानी गला मोटा और छोटा हो, उन्हें सांस की समस्याएं हो सकती हैं।

खर्राटे ऐसे करते दिल को नुकसान
मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि खर्राटों का प्रभाव ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इससे हार्ट पर लोड बढ़ जाता है। बहुत दिनों तक खर्राटों के आने से हार्ट फेल होने का खतरा है। धमनियों में वसा जमने लगती है। धमनियों की दीवारों पर खून के थक्के जमने लगते हैं। थक्का दिल में जाने से हार्ट अटैक और दिमाग की नस में जमने से ब्रेन अटैक होता है। डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया कि लोग झोलाछाप जांच करने वालों से बचें। 
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