10 से 15 फीसदी कम हुई फेफड़ों की क्षमता
नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन के साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. एसके कटियार ने बताया कि प्रदूषण के कारण फेफड़ों में हवा कम जा रही है। लोगों को कोई बीमारी नहीं होती है, लेकिन फेफड़ों की क्षमता 10 से 15 फीसदी कम हो जाती है।
प्रदूषित तत्वों के अलावा ठंडी हवा अंदर जाने से फेफड़ों की नलियां भी 10 से 15 फीसदी तक सिकुड़ जा रही हैं। इससे एयर फ्लो कम हो जाता है। ठंड में हवा में पर्याप्त ऑक्सीजन होने के बावजूद लोगों को सांस में दिक्कत रहती है।
सांस तंत्र में कोल्ड एलर्जी
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में सांस तंत्र में कोल्ड एलर्जी भी हो जाती है। इससे भी हवा का प्रवाह प्रभावित होता है। डॉ. कटियार ने बताया कि एक अध्ययन में कनपुरियों के फेफड़ों की क्षमता सामान्य से कम मिली थी। इससे हर आयु वर्ग के व्यक्ति को समस्या हो रही है।
सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ ने बताया कि ठंड के माहौल में प्रदूषण के कारण गैर संक्रामक फेफड़े की बीमारी हो जाती है। ठंड की वजह से फेफड़ों की स्थानीय व्यवस्था बिगड़ जाती है। इससे भी सामान्य व्यक्ति को भी सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।