रनियां (कानपुर देहात)। क्रोमियम से दूषित हुए भूजल के मामले में एनजीटी ने सख्ती दिखाई तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी हरकत में आ गए। एनजीटी के निर्देश पर बुधवार को टीम ने खानचंद्रपुर व उसके पास के तीन स्थानों पर पहुंच कर लोगों से जानकारी जुटाई। साथ ही पानी के क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराइड, जिंक आदि की जांच के लिए 10 नमूने लिए हैं। जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा।
क्षेत्रीय कार्यालय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी मनोज कुमार चौरसिया ने बताया कि मामले में एनजीटी सुनवाई कर रही है। तीन फरवरी को सुनवाई हुई। इसमें विभाग को प्रभावित क्षेत्र में जाकर लोगों की समस्याएं जानने, पानी की जांच कराने के निर्देश मिले हैं। इस पर बुधवार को वह विभाग के वैज्ञानिक आशीष कुमार, मनीष त्रिपाठी, एई नवनीत पांडेय के साथ खानचंद्रपुर, उमरन, घनारामपुर, शिवनाथपुरवा पहुंचे। यहां के लोगों से हो रही परेशानी व बीमारी आदि के लक्षण के बारे में जानकारी जुटाई।
टीम ने सामने आ रही समस्याओं तथा उनके सुझावों पर चर्चा की। बताया कि टीम ने सर्वे के दौरान प्रदूषित स्रोत से उपयोग किए जा रहे पानी के नमूने भी लिए। इस दौरान खानचंद्रपुर में चार, उमरन में तीन, घनारामपुर में दो और शिवनाथपुरवा एक पानी का सैंपल लिया गया। उन्होंने ग्रामीणों से संक्रमित जल स्रोतों का उपयोग पूरी तरह से बंद करने पर जोर दिया। साथ ही घरों के भीतर बोरिंग न कराने, कपड़े-बर्तन धोने, पशुओं को पानी पिलाने तथा अन्य दैनिक कार्यों में दूषित जल के प्रयोग से बचने को कहा गया।
कहा कि ऐसे जल स्रोत स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। गांव के लोगों को अवगत कराया कि सरकार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। इसमें पूर्व वर्षों में अवैध रूप से डंप किए गए क्रोमियम अपशिष्ट को हटाना, प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा क्रोमियम से प्रभावित लोगों को लक्षणों के आधार पर चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराना शामिल है।
इसके अलावा जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में पालतू पशुओं तथा खेती योग्य भूमि पर उगाई जा रही खाद्य फसलों में क्रोमियम प्रदूषण की जांच के निर्देश भी जारी किए हैं। इसके लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। (संवाद)