कानपुर। राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने शहर की सालों से बंद पड़ी एनटीसी और बीआईसी की मिलों को प्रदूषण फैलाने का नोटिस जारी किया है। इन मिलों के आला अधिकारियों से पूछा गया है कि मिल में प्रदूषण रोकने के क्या इंतजाम हैं। चेतावनी भी दी गई है कि इस संबंध में एक्शन प्लान नहीं भेजा गया तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब यह कि इस प्रोजेक्ट पर प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट की भी निगाह है। इस पर यह लापरवाही की हद है।
दरअसल, प्राधिकरण ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के तहत 25 मार्च को कानपुर की 476 औद्योगिक यूनिटों को नोटिस भेजा था। इनमें बीआईसी की कानपुर वूलेन मिल (लाल इमली), एल्गिन मिल-1,2 के अलावा एनटीसी की कानपुर म्योर मिल, न्यू विक्टोरिया मिल व स्वदेशी कॉटन मिल भी शामिल हैं। नोटिस को लेकर मिल प्रबंधन और कर्मचारियों का कहना है कि सालों से बंद पड़ी और ईंटों के ढेर में तब्दील हो चुकी मिलों में प्रदूषण होने का सवाल ही नहीं है। मिलों में पानी की निकासी तक ठप है। अधिकारियों की मानें तो नोटिस के जवाब में बंद मिल की स्थिति लिखने के अलावा उनके पास कोई जवाब नहीं है। नोटिस का सच जानने के लिए हमने मिलों की जो स्थिति देखी। पेश है उसका हाल...
न्यू विक्टोरिया मिल
मिल परिसर में ईंटों के ढेर के अलावा सिर्फ पेड़-पौधे और झाड़ियां बची हैं। दो-तीन कर्मचारी परिसर के छोटे से टीन शेड के आफिस में बैठे मिले। मिल में पीने का पानी भी बाहर से आता है। टॉयलेट तक यूज में नहीं है। कर्मचारियों ने कहा कि परिसर में डोमेस्टिक वेस्ट भी शून्य है। मिल की मैनेजमेंट कमेटी के मेंबर व मिल की देखरेख कर रहे आरके यादव ने बताया कि प्राधिकरण का नोटिस मिला है, पर मिल में प्रदूषण फैलाने जैसा कुछ भी नहीं बचा। नोटिस के जवाब में यह लिखकर भेजा जाएगा। मिल 2004 में आधिकारिक रूप से बंद हो चुकी है।
म्योर मिल
मिल 1991 से बंद है। आधिकारिक रूप से 31 मार्च 2004 से बंद घोषित हो चुकी है। मिल के कार्यालयों में दो चार कर्मचारी रखवाली के लिए बैठे दिखे। परिसर जंगल में तब्दील हो चुका है। पीने का पानी तक बाहर से आ रहा है। वेस्ट के नाम पर सिर्फ पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों के अलावा कुछ नहीं दिखा। मिल को मिले नोटिस के जवाब में ‘मिल बंद है’, लिखकर भेजा जा रहा।
स्वदेशी कॉटन मिल
मिल 2004 से बंद घोषित है। मिल परिसर खाली है। बाहर दुकानें और फेरी वाले खड़े मिलते हैं।
कानपुर वूलन मिल
मिल बंद नहीं है, पर मिल में दिसंबर 2013 से उत्पादन ठप है। ऐेसे में नोटिस इश्यू होने से कर्मचारी अचंभे में हैं। उनका कहना है कि मिल में डेढ़-दो साल से एक भी मशीन नहीं चली। 9-10 महीने से वेतन तक नहीं मिला। कर्मचारी हो या अधिकारी सब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। मिल के कार्यवाहक महाप्रबंधक राजा मित्रा ने बताया कि नोटिस मिला था। जवाब में फिलहाल मिल का उत्पादन बंद होने की बात लिखकर भेज दी गई है।
एल्गिन मिल-1, 2
दोनों मिलें 1992 से बीमार घोषित होकर बंद हो चुकी हैं। एल्गिन मिल-1 में कोई भी कर्मचारी नहीं बचा। मिल अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार मिल परिसर में पांच-छह सालों से लाल इमली (बीआईसी) का हेड आफिस चल रहा है। एल्गिन-2 भी सालों से बंद पड़ी है।
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हम सातों आईआईटी मिलकर गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए इसके मिशन पर काम कर रहे हैं, पर शहर की औद्योगिक यूनिटों को जो नोटिस भेजे गए हैं वह राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण नई दिल्ली से जारी हुए हैं।
-प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, कोऑर्डिनेटर (राष्ट्रीय गंगा रिवर बेसिन अथारिटी)