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मुस्लिमों को रिझाने के लिए सपा-बसपा ने लगाया एड़ी-चोटी का जोर

Thu, 23 Feb 2017 03:30 PM IST
राजेश सिंह, अमर उजाला, कानपुर

सार

- हर दल अपने आकाओं की रैली कराने में मशगूल 
- भाजपा ने मुस्लिमों के ध्रुवीकरण पर टिकाईं नजरें 
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विस्तार
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अल्पसंख्यकों को रिझाने में सपा और बसपा एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। मौदहा कस्बे में मुस्लिमों को रिझाने के लिए सीएम के जाते ही बसपा सुप्रीमो मायावती आ धमकीं। आजम खां के जाते ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कस्बे में जनसभा कर मुस्लिमों को बताया कि बसपा ही उनकी सच्ची हितैषी है। उधर, भाजपा ने मुस्लिमों के ध्रुवीकरण पर नजरें टिका रखीं हैं। 
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सदर विधानसभा क्षेत्र के मौदहा कस्बे सहित 12 गांवों में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी सबसे अधिक है। इन्हीं अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं पर सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा की नजरें टिकी हैं। सदर विधानसभा क्षेत्र में करीब 14 फीसदी अल्पसंख्यक मतदाता हैं। इस विधानसभा चुनाव से पहले चाहे लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा का, मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए सपा संरक्षक मुलायम सिंह मौदहा कस्बे में जनसभा जरूर करते थे।
 

जिस भी दल की तरफ इनका झुकाव हुआ, उसे फायदा जरूर मिला

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इस बार भी सपा और बसपा ने इस कस्बे में जनसभा की। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिमों को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी इस इलाके में हमदर्दी जताने आ चुके हैं। मांचा गांव में रात गुजारने के साथ अन्य कई गांवों में जाकर मुस्लिमों को रिझाया था। 

इस सीट पर मुस्लिम वोटर हमेशा निर्णायक रहे हैं। जिस भी दल की तरफ इनका झुकाव हुआ, उसे फायदा जरूर मिला है। 1977 में कांग्रेस के खिलाफ लहर होने के बावजूद भी कुंवर बहादुर मिश्रा 36.89 प्रतिशत मत पाकर चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि 1991 में मतों का ध्रुवीकरण होने से भाजपा के बादशाह सिंह ने 35.02 प्रतिशत मत हासिल कर चुनाव जीता था, लेकिन 1993 में पांसा पलटा और बसपा के बशीरुद्दीन ने भाजपा के बादशाह सिंह को 112 मतों से पराजित कर दिया था। अल्पसंख्यक वर्ग से बशीरुद्दीन ही विधायक बन सके हैं।

 
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सपा, बसपा और भाजपा की पैनी निगाहें

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सदर विधानसभा पर अब सपा, बसपा और भाजपा की पैनी निगाहें हैं। अल्पसंख्यक वोटरों को रिझाने में सपा और बसपा एक-दूसरे को मात देती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा के ठीक दूसरे दिन बसपा सुप्रीमो ने मौदहा में जनसभा की। दोनों दलों के नेताओं ने मुस्लिमों को रिझाने का भरसक प्रयास कर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। इधर, पीस पार्टी और निषाद पार्टी के गठबंधन ने इस बार एनुद्दीन उर्फ मौलाना खान को उतारकर मुस्लिम मतों को अपनी ओर मोड़ने में लगे हैं।

सोमवार को सपा के फायर ब्रांड नेता आजम खान की जनसभा हुई। वे भी मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने में जुटे रहे। इनके जवाब में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमउद्दीन मंगलवार को मुस्लिमों को रिझाने पहुंचे। अब तक हुए चुनावों का रुझान बताता है कि मतदाताओं का ध्रुवीकरण मतदान के अंतिम दिन होता है। मतदान से पहले की रात मुस्लिम मतदाता राय करते हैं। इस बार इनका ध्रुवीकरण किस तरफ होता है, यह तो वक्त ही बताएगा। 
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