उनके नामांकन के कुछ देर बाद ही सपा मुखिया अखिलेश यादव भी कलक्ट्रेट पहुंच गए। नामांकन के बाद वह पार्टी कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं का उत्साह बता रहा था कि मुखिया के चुनाव लड़ने के फैसले से उनका हौसला बढ़ा हुआ है। यहां अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को नामांकन कराने की जानकारी देते हुए इस बार रिकॉर्ड बनाने के लिए जोश भरा। कहा कि भाजपा के किसी बहकावे में नहीं आएं। गांव-गांव जाएं और मतदान वाले दिन ज्यादा से ज्यादा वोटरों को बूथों तक लेकर पहुंचे।
भाजपा पर बोला हमला, जनता इस बार इनके झांसे में नहीं आने वाली
नामांकन के बाद कलक्ट्रेट परिसर में ही मीडिया से रूबरू होकर अखिलेश यादव ने चुनाव लड़ने के फैसले पर खुलकर बात की। जनता इस बार झांसे में नहीं आने वाली है। विकास की अनदेखी, महंगाई की मार, बढ़ती बेरोजगारी, नौकरी के लिए पलायन जैसे मुद्दों पर जनता भाजपा को चुनाव में हराएगी। सपा ने सभी वर्ग के साथ और विकास की बात की है। जनता भाजपा की सरकार से तंग आकर इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने को तैयार है। पहले चरण के मतदान में जनता का मूड सामने आ चुका है। उसी से घबराकर भाजपा के लोग अब मुद्दों से हटकर नफरती भाषा बोलने लगे हैं।
नामांकन के दौरान प्रस्तावकों व समर्थकों को सामने कर दिया सियासी संदेश
नामांकन के दौरान अखिलेश यादव जिन प्रस्तावकों और समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे, उससे उन्होंने जातीय समीकरण साधते हुए सियासी संदेश भी दिया है। उनके साथ जो चार प्रस्तावक रहे, उसमें अलग-अलग जातियों के चेहरे रहे। दलित समुदाय से पूर्व विधायक कल्याण सिंह दोहरे और पूर्व विधायक अनिल दोहरे के पुत्र यश दोहरे रहे। इनके बहाने बसपा के वोट में सेंध लगाने की कोशिश की गई। पिछड़ी जाति से प्रदेश सचिव आकाश शाक्य रहे। चौथे प्रस्तावक जिलाध्यक्ष कलीम खान रहे। इसके अलावा पार्टी के पुराने रणनीतिकार के रूप में शामिल ब्रजेंद्र नारायण सक्सेना उर्फ गुड्डू सक्सेना को साथ ले जाना नहीं भूले। ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए मनोज दीक्षित और जय तिवारी उर्फ बउअन तिवारी भी नामांकन के दौरान साथ रहे। लोधी समुदाय को साधने के लिए बिधूना की विधायक रेखा वर्मा भी मौजूद रहीं।