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पुलिस इनकी ‘मुट्ठी’ में

Fri, 20 Feb 2015 03:32 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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जिसके खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट हो, कुर्की का आदेश हो, पुलिस रिकॉर्ड में फरार घोषित हो, वह शख्स अगर खुलेआम एसएसपी आफिस के गेट पर एसएसपी के पीआरओ के साथ मजे से बतियाता दिखे तो क्या कहेंगे?...पुलिस इनकी मुट्ठी में। जी हां, पुलिस इनकी मुट्ठी में।
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पुलिस की छवि पर बट्टा लगाती यह हकीकत गुरुवार को पेश आई। इसमें एसएसपी के पीआरओ की कर्तव्यनिष्ठा तो दांव पर लगी ही, साथ ही कप्तान के सूचना तंत्र पर भी सवाल उठा। आखिर उनके दफ्तर के गेट पर यह शख्स कानून को ठेंगा दिखाता रहा तो उन्हें पता क्यों नहीं चला।

शाम को मीडिया ने उन्हें बताया तो वे हरकत में आए और पीआरओ को तलब करके पूछताछ की। खास बात यह है कि यह शख्स एक पुलिस वाला ही है इसलिए पुलिस पर लंबे समय से इसे बचाने के आरोप लगते रहे हैं जो आज सिद्ध हो गए।
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बात हो रही है बांदा के कांग्रेसी नेता संजीव अवस्थी को नकली नोट मामले में फंसाने के आरोपी इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी की। दोपहर में इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी  एसएसपी दफ्तर में टहलते नजर आए।

एसएसपी के पीआरओ शशि भूषण मिश्र से घंटे भर गपशप करते रहे। इस दौरान एसपी से लेकर कांस्टेबल तक एसएसपी दफ्तर में आते-जाते रहे लेकिन किसी ने भी इंस्पेक्टर को पकड़ने की हिम्मत नहीं की।

आम आदमी के खिलाफ मामूली केस में घर तक खोद डालने वाली पुलिस दागी इंस्पेक्टर को क्यों नहीं पकड़ रही, सब जानते हैं। बता दें कि संजीव अवस्थी को फरवरी 2011 में तत्कालीन कलक्टरगंज इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी ने गिरफ्तार किया था। कांग्रेस नेता से करीब साढ़े चार लाख रुपये के नकली नोट बरामद करने का दावा किया था। संजीव के साथ उनके ड्राइवर समेत तीन लोगों को गिरफ्तारी की गई थी।

संजीव ने जेल से छूटने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए और मामले की जांच ईओडब्लू को स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए थे। ईओडब्लू के विवेचक ने जांच के बाद कांग्रेस नेता और उनके दोनों साथियों को क्लीन चिट दी।

इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी और अन्य पुलिसकर्मियों को दोषी माना। इस वक्त मामले की जांच इंस्पेक्टर राकेश रैना कर रहे हैं। इस मामले में इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी समेत नौ पुलिस कर्मियों और पुलिस की तरफ से गवाह रहे दो लोगों को कांग्रेस नेता को झूठे मामले में फंसाने का आरोप है।

इनकेखिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। आरोपी सभी पुलिसकर्मी सस्पेंड हैं पर अभी आरोपी इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी समेत पांच पुलिस कर्मी और पुलिस के दो गवाहों ने खुद को कानून के हवाले नहीं किया है। इनके खिलाफ कोर्ट गैर जमानती वारंट और कुर्की (धारा 82) का आदेश पारित कर चुकी है।

ईओडब्लू के विवेचक इंस्पेक्टर राकेश रैना एसएसपी से लेकर एसओ कलक्टरगंज को फरार चल रहे इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी समेत नौ लोगों के गिरफ्तारी और कुर्की संबंधी कागजात दे चुके हैं पर, अभी तक शहर की पुलिस एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

उधर,फरार इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी और पुलिस की तरफ से गवाह रहे अब्दुल बहाव के खिलाफ कुर्की के आदेश कोर्ट ने दिए हैं। गुरुवार को ईओडब्लू के विवेचक राकेश रैना ने कोर्ट में कुर्की के आदेश के लिए कार्रवाई की। शाम को कोर्ट ने इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी और अब्दुल बहाव के घरों की कुर्की के आदेश दे दिए।

सूत्रों मानें तो आरोपी इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी और अब्दुल बहाव को छोड़कर सबइंस्पेक्टर दिलीप वर्मा, सबइंस्पेक्टर भारत सिंह, कांस्टेबल बृजेश बहादुर, कांस्टेबल रमेश चंद्र वैश्य समेत अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों और पुलिस के गवाह ने कोर्ट में सरेंडर की अर्जी दे रखी है। इस वजह से इन पुलिसकर्मियों की कुर्की का आदेश नहीं मिला है।

एसएसपी शलभ माथुर का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। लोकल पुलिस के पास जो भी जानकारी होगी वह विवेचक को दी जाएगी, जिससे आरोपी इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी हो सके ।
एसएसपी, पीआरओ शशिभूषण मिश्र का कहनै है कि मैं सरकारी काम से कचहरी गया था, लौटते समय एसएसपी दफ्तर के गेट पर इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी से मुलाकात हो गई। कुछ देर बातचीत हुई।

एसओ कलक्टरगंज, आशीष कुमार मिश्र का कहना है कि फरार इंस्पेक्टर की तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। अभी तक इंस्पेक्टर की लोकेशन नहीं मिली है।
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