रेप के प्रयास में घायल महिला और उसके घरवालों को इस तरह लोडर पर लाद दिया
सीएम योगी आदित्यनाथ पुलिस की बिगड़ी छवि को सुधारने की चाहे कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन लगता है ये पुलिस कभी सुधरने वाली नहीं है। कानपूर पुलिस का कारनामे तो यही दर्शा रहे है। रविवार रात कानपूर पुलिस का एक ऐसा ही गैरजिम्मेदार चेहरा नजर आया यहां पुलिस ने रेप के प्रयास में घायल एक महिला और उसके पति समेत तीन घायलो को पहले तो इलाज के लिए जिला हास्पिटल में भर्ती कराया था लेकिन आधी रात के बाद तीनो को एक लोडर में लदवा कर मेडिकल कराने के नाम पर आठ किलोमीटर प्राथमिक चिकित्सालय भेज दिया जबकि मेडिकल जिला हास्पिटल में भी होता है और दिन में भी कराया जा सकता था।।
बिठूर इलाके में रहने वाले सूरज के घर में रविवार रात को कुछ लोगो ने हमला कर दिया। नीरज की पत्नी सुनीता (दोनों काल्पनिक नाम) का आरोप था की गांव के प्रधान राहुल अपने साथियों के साथ मेरे घर में घुसकर आये थे वह मेरा रेप करने के लिए खींच कर लिए जा रहे थे मेरे पति और हमने विरोध किया तो उसने मेरा ब्लाउज फाड़ डाला उसके बाद मुझे मेरे पति और रिस्तेदार रामखेलावन पर हमला कर दिया। पीड़ित महिला ने बताया कि राहुल मिश्रा मेरे घर में घुस आये थे उन्होंने मेरा ब्लाउज फाड़ डाला मुझे खीचकर बाहर लाये और रेप करने को लिए जा रहे थे हमको बहुत मारा। इस हमले में सूरज सोमवती और रामखेलावन तीन लोग घायल हुए थे जिनको बिठूर पुलिस ने पहले एम्बुलेंस से जिला हास्पिटल उर्सला में भर्ती कराया था वहां डॉक्टरों ने जब तीनों का इलाज शुरू कर दिया तभी आधी रात को पुलिस को न जाने क्या सुझा की तीनों घायलों को एक लोडर पर लदवाकर जिला हास्पिटल से आठ किलोमीटर दूर बारासिरोही प्राथमिक हास्पिटल मेडिकल करवाने भिजवा दिया जबकि तीनों घायल थे उनके पट्टियां बंधी थीं जबकि जिला हास्पिटल में भी मेडिकल किया जाता है। इन घायलो को अगर भेजना भी था तो सरकारी एम्बुलेंस से भेजा जा सकता था और फिर मेडिकल सुबह भी तो हो सकता था। घायल पति नीरज का कहना था की जब जिला हास्पिटल बड़ा है तो यहाँ से छोटे हास्पिटल क्यों भेज रहे है लेकिन पुलिस ने उसकी सुनी ही नहीं ,वैसे पुलिस इस हमले को रेप की जगह प्रधान और पीड़ितों के बीच सड़क खड़ंजे का मामला बता रही है।